मध्य प्रदेश में बारिश का दौर फिर लौटेगा। IMD (मौसम केंद्र), भोपाल ने 31 जनवरी और 1-2 फरवरी को प्रदेश के ज्यादातर हिस्से में बारिश होने का अलर्ट जारी किया है। स्ट्रॉन्ग वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) की वजह से ऐसा होगा। इससे पहले शुक्रवार को प्रदेश के करीब आधे हिस्से में घना कोहरा छा रहा है। मौसम विभाग के अनुसार, शुक्रवार सुबह भोपाल, ग्वालियर, चंबल, सागर, जबलपुर, रीवा और शहडोल संभाग के 24 जिलों में कहीं हलका तो कहीं मध्यम कोहरा छा रहा है। ग्वालियर, रीवा, शहडोल, सागर, गुना, शिवपुरी, अशोकनगर, राजगढ़, विदिशा, निवाड़ी, दतिया, श्योपुर, मुरैना, भिंड, टीकमगढ़, छतरपुर, दमोह, पन्ना, कटनी, सतना, मैहर, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली में भी कोहरे का असर है। मौसम वैज्ञानिक अरुण शर्मा ने बताया कि वेस्टर्न डिस्टरबेंस की वजह से प्रदेश में एक बार फिर से बारिश का दौर शुरू होगा। 31 जनवरी, 1-2 फरवरी को बारिश होने का अलर्ट है। इससे पहले कोहरे का असर बना रहेगा। अगले 3 दिन बारिश का अलर्ट सिस्टम लौटने के बाद कड़ाके की सर्दी
पहाड़ी राज्य- हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर में भारी बर्फबारी और बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। इस वजह से समुद्र तल से 12.6 किलोमीटर की ऊंचाई पर करीब 241 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से जेट स्ट्रीम हवाएं भी बह रही है। इसका असर एमपी में भी दिखाई दे रहा है। गुरुवार को दिन में सर्द हवाएं चलती रही। ग्वालियर-चंबल हिस्से में सर्द हवाओं का असर ज्यादा रहा और अधिकतम तापमान में गिरावट देखी गई। मौसम विभाग का कहना है कि जब सिस्टम वापस लौटेगा तो ठंड का असर फिर से बढ़ जाएगी। मध्य प्रदेश में भी दिन-रात के तापमान में गिरावट देखने को मिलेगी। मंदसौर में पारा 5 डिग्री से नीचे, पचमढ़ी भी ठंडा रहा
ओले और बारिश का दौर थम के बाद प्रदेश में सर्दी और घने कोहरे का असर बढ़ गया है। गुरुवार की सुबह प्रदेश के ज्यादातर हिस्से में कोहरा छाया रहा। स्थिति यह है कि सुबह 10 बजे तक भी कई जिलों में धूप नहीं खेली है। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर समेत 20 से ज्यादा जिलों में मध्यम से घना कोहरा छाया हुआ था। इस वजह से आम लोगों के सामने मुश्किलें भी बढ़ गई। मौसम विभाग के अनुसार, ग्वालियर, दतिया में सबसे घना कोहरा रहा। उज्जैन, सागर, भोपाल, नर्मदापुरम, इंदौर, राजगढ़, रतलाम, जबलपुर, खजुराहो, सतना, मलाजखंड, धार, गुना, रायसेन, श्योपुर, छिंदवाड़ा, मंडला, नरसिंहपुर, सागर, सिवनी, उमरिया में भी विजिबिलिटी कम रही। इधर, रात के तापमान में भी गिरावट हुई है। मंदसौर में तापमान 5 डिग्री से नीचे पहुंच गया। वहीं, इकलौता हिल स्टेशन पचमढ़ी दूसरा सबसे ठंडा रहा। दिन में 20 डिग्री से नीचे पारा, ग्वालियर में सबसे कम 19.6 डिग्री रहा
मध्य प्रदेश में भले ही रात में कड़ाके की ठंड से राहत हो, लेकिन दिन में कई शहरों में तेज सर्दी है। गुरुवार को ग्वालियर में अधिकतम तापमान सबसे कम 19.6 डिग्री रहा। दतिया में 20.3 डिग्री, भोपाल में 20.4 डिग्री, श्योपुर में 20.6 डिग्री, नौगांव में 20.7 डिग्री, रतलाम-रीवा में 21.2 डिग्री, गुना में 21.8 डिग्री, खजुराहो-टीकमगढ़ में 22 डिग्री, इंदौर में 22.2 डिग्री, दमोह-दमोह में 22.4 डिग्री, सागर में 22.8 डिग्री, सतना में 22.7 डिग्री, उज्जैन में 23 डिग्री, धार में 23.2 डिग्री, जबलपुर में 23.3 डिग्री सेल्सियस रहा। MP के 5 बड़े शहरों में जनवरी में ऐसा रहा सर्दी का ट्रेंड… भोपाल में 0.6 डिग्री पहुंच चुका टेम्परेचर
भोपाल में जनवरी में कड़ाके की ठंड पड़ती है। वहीं, दिन में गर्मी का एहसास और बारिश का ट्रेंड भी है। 18 जनवरी 1935 को रात का टेम्परेचर रिकॉर्ड 0.6 डिग्री सेल्सियस रहा था। वहीं, 26 जनवरी 2009 को दिन में तापमान 33 डिग्री दर्ज किया गया था। पिछले 10 में से 7 साल बारिश हो चुकी है। 24 घंटे में सबसे ज्यादा 2 इंच बारिश 6 जनवरी 2004 को हुई थी। वहीं, सर्वाधिक मासिक 3.8 इंच बारिश जनवरी 1948 में हुई थी। इंदौर में माइनस 1.1 डिग्री पहुंच चुका पारा
इंदौर में जनवरी में सर्दी का रिकॉर्ड माइनस में पहुंच चुका है। 16 जनवरी 1935 में पारा माइनस 1.1 डिग्री दर्ज किया था। यह ओवरऑल रिकॉर्ड है। वहीं, 27 जनवरी 1990 को दिन का तापमान 33.9 डिग्री रहा था। 24 घंटे में सर्वाधिक बारिश होने का रिकॉर्ड 6 जनवरी 1920 के नाम है। इस दिन 3 इंच से ज्यादा पानी गिरा था। वहीं, वर्ष 1920 में सर्वाधिक मासिक बारिश 4 इंच दर्ज की गई थी। जबलपुर में 1946 में रिकॉर्ड 1.1 डिग्री रहा था पारा
जबलपुर में भी जनवरी में ठंड-बारिश का ट्रेंड है। इस महीने सबसे ज्यादा ठंड पड़ती है। 7 जनवरी 1946 को रात का पारा रिकॉर्ड 1.1 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया था। वहीं, दिन का उच्चतम तापमान 33.4 डिग्री 7 जनवरी 1973 को रहा था। इस महीने बारिश भी होती है। 24 घंटे में सर्वाधिक बारिश 24 जनवरी 1919 को 2.5 इंच हुई थी। इसी साल पूरे महीने 8 इंच से ज्यादा पानी गिरा था। उत्तरी हवा आने से ग्वालियर सबसे ठंडा
उत्तरी हवाओं की वजह से प्रदेश का ग्वालियर-चंबल सबसे ठंडा रहता है। जनवरी में यहां कड़ाके की ठंड का ट्रेंड है। पिछले 10 साल का रिकॉर्ड देखें तो 2018 में तापमान 1.9 डिग्री और 2019 में 2.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया था। 24 जनवरी 1954 को रात का तापमान माइनस 1.1 डिग्री रहा था। ग्वालियर में जनवरी में बारिश भी होती है। साल 2014 से 2024 के बीच 9 साल बारिश हो चुकी है। 24 घंटे में सर्वाधिक बारिश का रिकॉर्ड 8 जनवरी 1926 को है। इस दिन 2.1 इंच पानी गिरा था। वहीं, 1948 को कुल मासिक बारिश 3.1 इंच हुई थी। उज्जैन में जीरो डिग्री रह चुका पारा
उज्जैन में भी उत्तरी हवा का असर रहता है। इस वजह से यहां कड़ाके की ठंड पड़ती है। 22 जनवरी 1962 को पारा 0 डिग्री सेल्सियस रहा था। पिछले 10 साल में टेम्परेचर 2 से 5.8 डिग्री सेल्सियस तक रह चुका है। 24 घंटे में सर्वाधिक बारिश होने का रिकॉर्ड 11 जनवरी 1987 के नाम है। इस दिन सवा इंच पानी गिरा था। वहीं, सर्वाधिक कुल मासिक 2.2 इंच 1994 को हुई थी।
आधे MP में कोहरा…कल से फिर बारिश का अलर्ट:स्ट्रॉन्ग सिस्टम से 3 दिन भीगेगा प्रदेश; भोपाल, इंदौर-ग्वालियर में भी अलर्ट
