यूपी के एनकाउंटर स्पेशलिस्ट डीके शाही को 5वां वीरता पदक:चप्पल में बदमाश को मारा था; 715 पुलिसवालों को DGP देंगे मेडल, देखिए लिस्ट

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यूपी STF के DSP धर्मेंद्र कुमार शाही (डीके शाही) को केंद्र सरकार ने वीरता पदक (गैलेंट्री अवॉर्ड) से नवाजा है। उन्हें यह सम्मान गणतंत्र दिवस 2026 के अवसर पर दिया जाएगा। डीके शाही को वीरता पदक मथुरा में 7 अगस्त, 2024 को एक लाख के इनामी बदमाश पंकज यादव के एनकाउंटर के लिए मिल रहा है। यह वही डीके शाही हैं, जिन्होंने सुल्तानपुर डकैती में वांटेड मंगेश यादव का एनकाउंटर किया था। डीके शाही को लेकर उस वक्त खूब सियासत हुई। वजह थी- एनकाउंटर स्पॉट पर उनकी एक तस्वीर। इसमें वह चप्पल पहने नजर आए थे। 2 सितंबर 2024 को मंगेश यादव का सुल्तानपुर में एनकाउंटर हुआ था। इसके तुरंत बाद सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा था- जाति देखकर मंगेश यादव का एनकाउंटर किया गया। यही नहीं, थोड़े दिन बाद उन्होंने डीके शाही पर भी कमेंट किया। कहा था- अगर दिमाग होता, तो चप्पल में एनकाउंटर नहीं करते। कोई इस पर STF से सवाल पूछेगा। वहीं, पूर्व IPS अमिताभ ठाकुर ने भी एनकाउंटर पर सवाल उठाते हुए कहा था- पहली बार किसी अफसर को चप्पल पहनकर एनकाउंटर करते देखा। डीके शाही ने अपनी पहचान एक एनकाउंटर स्पेशलिस्ट के तौर बना रखी है। डीके शाही ने अबतक 50 से ज्यादा एनकाउंटर किए हैं। उन्हें पांचवी बार सम्मान मिलने जा रहा है। उनके अलावा ASP राकेश, सत्यप्रकाश सिंह और यशवंत सिंह को भी वीरता पदक दिया गया है। खास बात ये है कि इस बार यूपी पुलिस के 18 पुलिस कर्मियों को वीरता पदक के लिए चुना गया है। इसमें 14 पुलिस कर्मी STF के हैं। इसके अलावा 4 पुलिस कर्मियों को उत्कृष्ट सेवा पदक और 68 पुलिस कर्मियों को सराहनीय सेवा के लिए केंद्र सरकार की ओर से पदक दिया गया है। अब जानिए वो एनकाउंटर, जिसके लिए शाही को मिलेगा अवॉर्ड
डीके शाही को यह वीरता पदक पंकज यादव के एनकाउंटर के लिए दिया गया। 34 साल का पंकज मुख्तार और शाहबुद्दीन गैंग का शॉर्प शूटर था। पंकज पर एक लाख का इनाम था। काफी वक्त से फरार था। 7 अगस्त, 2024 को मुखबिर से सूचना मिली थी कि पंकज अपने एक साथी के साथ बाइक से आगरा की तरफ जा रहा है। STF ने घेराबंदी की तो वह गांव की तरफ भागने लगा और फायरिंग शुरू कर दी। एसटीएफ ने भी जवाबी फायरिंग की। इसमें पकंज को तीन गोलियां लगीं। एक गोली उसके पैर में, दूसरी कमर पर और तीसरी गोली सिर पर लगी। वहीं, उसका साथी अंधेरे का फायदा उठाकर भागने में कामयाब रहा। पंकज को जिला अस्पताल लाया गया। यहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पंकज मऊ में ठेकेदार मन्ना सिंह हत्याकांड के मुख्य गवाह और उसके पुलिस सुरक्षाकर्मी की हत्या का मुख्य आरोपी था। उस पर हत्या, लूट, डकैती और रंगदारी समेत 40 से ज्यादा मुकदमे दर्ज थे। वह मऊ जिले के थाना रानीपुर के गांव तहिरापुर का रहने वाला था। अब जानिए कौन हैं डीके शाही यूपी पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक, 1974 को जन्मे डीके शाही मूल रूप से देवरिया के रहने वाले हैं। साल 2019 में वह डिप्टी एसपी की रैंक पर प्रमोट हुए। डीके शाही की पत्नी ऋतु शाही बीजेपी की नेता हैं। मंगेश यादव एनकाउंटर से पहले ऋतु शाही को उत्तर प्रदेश महिला आयोग का सदस्य नियुक्त किया था। डीके शाही ने अब तक 50 से ज्यादा एनकाउंटर किए हैं। पहली बार वह 2004 में चर्चा में आए थे, जब उन्होंने इनामी बदमाश देवेंद्र उर्फ सुल्तान को गिरफ्तार किया था। सुल्तान पर दो सिपाहियों की हत्या का आरोप था और उस पर 1 लाख का इनाम भी रखा गया था। लुटेरों ने युवक की हत्या की, बहन की शादी में शामिल हुए डीके शाही इन अफसरों को भी मिला वीरता पुरस्कार…
715 पुलिसकर्मियों को DGP से मिलेगा मेडल
गणतंत्र दिवस के मौके पर DGP की तरफ से दिए जाने वाले उत्कृष्ट सेवा सम्मान मेडल और सराहनीय सेवा मेडल का भी ऐलान कर दिया गया है। इसमें कुल 715 लोगों को सम्मानित किया जाएगा। प्रमुख नामों में वाराणसी के अपर पुलिस आयुक्त शिवहरि मीणा, आगरा के अपर पुलिस आयुक्त राम बदन सिंह, उन्नाव के एसपी जय प्रकाश सिंह और चित्रकूट के एसपी अरुण कुमार सिंह को डीजीपी का प्रशंसा चिन्ह प्लेटिनम दिया जाएगा। इसी तरह फिरोजाबाद के एसपी सौरभ दीक्षित, नोएडा में पुलिस उपायुक्त रविशंकर निम, सीतापुर के एसपी अंकुर अग्रवाल, मऊ के एसपी इलामारन जी और कानपुर देहात की एसपी श्रद्धा नरेंद्र पांडेय को शौर्य के आधार पर डीजीपी का प्रशंसा चिन्ह स्वर्ण देने का फैसला किया गया है। ——————- यह खबर भी पढ़िए:- ममता कुलकर्णी ने पूछा- ‘क्या अखिलेश सरकार में रुकेगी गोहत्या?:अविमुक्तेश्वरानंद विवाद पर बोलीं- 10 में 9 महामंडलेश्वर और शंकराचार्य झूठे पूर्व एक्ट्रेस और किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर ममता कुलकर्णी (यामाई ममता नंद गिरि) शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद विवाद में कूद पड़ी हैं। उन्होंने दो सवाल पूछे। पहला- उन्हें शंकराचार्य किसने नियुक्त किया। दूसरा- करोड़ों की भीड़ में रथ (पालकी) लेकर निकलने की क्या जरूरत थी? ममता कुलकर्णी ने आरोप लगाया कि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरांनद की वजह से ही उनके शिष्यों को पिटाई झेलनी पड़ी। अगर स्नान करना ही था तो पालकी से उतरकर पैदल जाकर स्नान किया जा सकता था। गुरु होने का अर्थ जिम्मेदारी से भरा आचरण होता है न कि ऐसी जिद, जिसकी कीमत शिष्यों को चुकानी पड़े। पढ़ें पूरी खबर…