साल 2026 के पद्म अवॉर्ड्स का ऐलान कर दिया गया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के मुताबिक, इस साल 5 हस्तियों को पद्म विभूषण, 13 को पद्म भूषण और 113 को पद्मश्री सम्मान से नवाजा जाएगा। इनमें मध्य प्रदेश की 4 हस्तियां शामिल हैं। भोपाल के लेखक कैलाश चंद्र पंत, मध्य प्रदेश जन अभियान परिषद के उपाध्यक्ष मोहन नागर, सागर के मार्शल आर्ट कलाकार भगवानदास रैकवार और उज्जैन के नारायण व्यास को पद्मश्री सम्मान दिया जाएगा। भगवानदास रैकवार को खेल (मार्शल आर्ट) , कैलाश चंद्र पंत को साहित्य एवं शिक्षा, मोहन नागर को समाज सेवा और नारायण व्यास को पुरातत्व क्षेत्र से समान के लिए चुना गया है। पंत ने आर्य समाज को बनाया संस्कार भूमि, स्कूल में संघ से जुड़े वरिष्ठ साहित्यकार, पत्रकार और सांस्कृतिक चिंतक कैलाश चंद्र पंत का जन्म 26 अप्रैल 1936 में महू में हुआ था। दैनिक भास्कर से खास बातचीत में उन्होंने आर्य समाज को अपनी संस्कार भूमि बताया। पंत ने कहा- मेरे ताऊजी आर्य समाजी थे। उनके साथ संन्यासियों के प्रवचन सुनने जाता था। हवन में बैठता था। आर्यवीर दल की गतिविधियों में भाग लेता थे। स्कूल के दिनों से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ गया था। 14 जनवरी 1949 को एक सत्याग्रह के दौरान गिरफ्तारी भी दी। तब मेरी उम्र 13 साल ही थी। कोर्ट में पेशी के बाद जज साहब ने 2 महीने की सख्त सजा दे दी। जेल पहुंचने के दो-तीन घंटे बाद हमारे बरी होने के ऑर्डर आ गए थे। नागर बोले- पुरस्कार आदिवासी और जनजातीय समाज को समर्पित राजगढ़ के सारंगपुर के रहने वाले मोहन नागर को पर्यावरण और जल संरक्षण के क्षेत्र में किए गए काम के लिए यह सम्मान मिला है। छोटे से गांव रायपुरिया में 23 फरवरी 1968 को जन्मे मोहन नागर को आदिवासियों की मदद और जल संरक्षण के लिए ‘जल पुरुष’ कहा जाता है। मोहन नागर पिछले तीन दशक से बैतूल स्थित भारत भारती शिक्षा संस्थान से जुड़े हैं। मध्य प्रदेश जन अभियान परिषद में उपाध्यक्ष हैं। उनके नेतृत्व में जिले में जल संरक्षण, नदी पुनर्जीवन और सामाजिक चेतना से संबंधित कई नवाचार चल रहे हैं। उन्होंने भास्कर से चर्चा में कहा- यह पुरस्कार जिले की जनता, विशेषकर आदिवासी और जनजातीय समाज को समर्पित है। भगवान दास ने अखाड़े के लिए छोड़ दी बैंक की नौकरी सागर के भगवान दास रैकवार (83) को अखाड़ा संस्कृति की प्राचीनतम युद्ध शैली के लिए पद्मश्री अवार्ड मिला है। दैनिक भास्कर से उन्होंने कहा- 16 साल की उम्र में परिवार और गुरु के कहने पर अखाड़ा खेलना शुरू किया था। फिर इसे ही आत्मा बना लिया। रैकवार ने बताया- सागर में ही सरकारी बैंक में नौकरी करता था। अखाड़े का प्रशिक्षण देने के लिए अक्सर दूसरे राज्यों में जाना पड़ता था। समय कम पड़ने पर 1998 में बैंक की नौकरी से त्यागपत्र दे दिया। फिर पूरा समय अखाड़े को ही देने लगा। रूस, हिमाचल प्रदेश, हैदराबाद, जयपुर, लखनऊ, नागपुर, मुंबई समेत कई जगह प्रशिक्षण देने गया। बेटे राजकुमार रैकवार बोले- पिताजी के शिष्य पूरे देश में फैले हैं। उनकी एक शैली थी- बंदिश। इसमें वे रस्सी, तार की तरह किसी भी व्यक्ति को लट्ठ से बांध देते थे। वह तब तक नहीं छूट पाता था, तब तक वह स्वयं न खोलें। व्यास बोले- देश की धरोहरों को जाने नई पीढ़ी, यही उद्देश्य उज्जैन के रहने वाले नारायण व्यास बोले- मैं पुरातत्व, मूर्तिकला और चित्रकला के क्षेत्र में काम कर रहा हूं। उद्देश्य यही है कि आने वाली पीढ़ी देश की धरोहरों के बारे में जाने और इन्हें संरक्षित करें। शासन तो इनके लिए काम करता ही है लेकिन लोगों की भी जिम्मेदारी है कि इन्हें सुरक्षित रखें।
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MP के कैलाश चंद्र समेत 4 को पद्मश्री:संघ के लिए 13 साल की उम्र में जेल गए; मोहन नागर, भगवानदास रैकवार, नारायण व्यास को भी सम्मान
