अनिरुद्धाचार्य बोले- प्रशासन को इतनी अकड़ क्यों?:पीठाधीश्वर बोले- भयंकर युद्ध को आमंत्रण जैसा; रविंद्र पुरी ने कहा- अविमुक्तेश्वरानंद गलत

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प्रयागराज में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और प्रशासन के बीच चल रहे विवाद के बीच संत समाज दो धड़ों में बंट गया है। काशी, अयोध्या और मथुरा समेत देश के संतों में कुछ अविमुक्तेश्वरानंद को सही बता रहे, तो कुछ उन्हें गलत कह रहे। कथावाचक अनिरुद्धाचार्य महराज ने कहा- प्रशासन ने गलती तो की है। ब्राह्मणों और साधुओं को चोटी पकड़कर मारा है। प्रशासन माफी क्यों नहीं मांग ले रहा? वहीं, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रविंद्र पुरी ने कहा कि CM को अपशब्द करने वाला संत नहीं हो सकता। पढ़िए साधु-संतों ने जो कुछ कहा… शंकराचार्य सदानंद सरस्वती बोले- बटुक ब्राह्मणों को पीटा गया, यह गलत
द्वारका के शारदा पीठ के शंकराचार्य सदानंद सरस्वती का कहना है कि प्रशासन शिखा का अर्थ नहीं जानता है, जिसे पकड़ उन्होंने संतों को मारा। शिखा जो होती है, उसमें ब्रह्मा का वास होता होता है। गंगा स्नान करने के लिए शंकराचार्य और बटुक ब्राह्मणों को पीटा गया, यह गलत है। यह शासन का अहंकार है। कभी अपनी सत्ता का दुरुपयोग नहीं करना चाहिए। गंगा स्नान करने से रोकने वालों को गोहत्या का पाप लगता है। यह शास्त्र का वचन है। इसलिए ऐसा काम नहीं करना चाहिए। अगर हमें कोई बल मिला है, तो उसका दुरुपयोग नहीं करना चाहिए। हम प्रशासन के इस कृत्य की घोर निंदा करते हैं। अनिरुद्धाचार्य बोले- प्रशासन माफी मांगे
कथावाचक अनिरुद्धाचार्य महाराज ने कहा- प्रशासन ने गलती तो की है। ब्राह्मणों और साधुओं को चोटी पकड़कर मारा। प्रशासन माफी क्यों नहीं मांग ले रहा? माफी मांगने में इतनी देरी क्यों हो रही? संत तो दयावान होते हैं, तुरंत माफ कर देंगे। क्षमा मांग लेने में आखिर प्रशासन को किस बात की अकड़ है? यह अधिकार आपको किसने दिया है कि किसी का चोटी पकड़कर आप मारेंगे? क्या यह अधिकार आपको संविधान ने दिया है? संतों के चरणों में जाइए, गलती हुई तो माफी मांगिए। प्रशासन को लंबा नहीं खींचना चाहिए। शरण में जाने पर संत माफ कर देते हैं। निश्चलानंद ने अविमुक्तेश्वरानंद को बताया ‘लाडला’
पूरी के गोवर्धन मठ के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने कहा- अविमुक्तेश्वरानंद का निर्णय अकाट्य होता है। उनके निर्णय को सर्वोच्च न्यायालय तक मान्यता देता है। उन्होंने अविमुक्तेश्वरानंद को अपना ‘लाडला’ कहकर उनके प्रति स्नेह भी प्रदर्शित किया। शंकराचार्य ने कहा- किसी भी विवाद पर प्रतिक्रिया तभी दी जा सकती है, जब वह आधिकारिक रूप से उनके संज्ञान में लाया जाए। यह भयंकर युद्ध को आमंत्रित करने जैसा है। जब तक हमारा खून नहीं खौल रहा, तब तक ये सब चलता रहेगा। रविंद्र पुरी बोले- CM को हुमायूं को बेटा बोलने वाला संत नहीं
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रविंद्र पुरी ने कहा- प्रयागराज में मिनी महाकुंभ चल रहा। मुख्यमंत्री को अकबर और हुमायूं का बेटा बताए जाने पर कहा कि यह एक संत की भाषा नहीं हो सकती। उन्हें कोई शिकायत थी, तो मुख्यमंत्री से शिकायत करते या कोर्ट जाते। वह सीधे मुख्यमंत्री पर क्यों निशाना साध रहे? हम संत समाज इसकी कड़ी निंदा करते हैं। अविमुक्तेश्वरानंद पर सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। सनातन को आगे बढ़ाने का काम अगर कोई कर रहा, तो वह प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और गृहमंत्री कर रहे हैं। रविंद्र पुरी ने कहा- जब अयोध्या में राममंदिर बन रहा था तो आपने (अविमुक्तेश्वरानंद) कहा कि राम मंदिर क्यों बन रहा? जहां भी काम होता है, वहां ये विरोध करते हैं। हम लोग प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के खिलाफ इस तरह की बात नहीं सुन सकते। मुख्यमंत्री योगी खुद एक संत हैं और पीठाधीश्वर हैं। हम उनके खिलाफ इस तरह का षडयंत्र बर्दाश्त नहीं करेंगे। परिषद के संतों से बात करेंगे। श्रृंगवेरपुर पीठाधीश्वर बोले- शंकराचार्य राजनीति न करें
श्रृंगवेरपुर के पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामानुजाचार्य शांडिल्य महाराज ने कहा- प्रशासन को संतों को नहीं मरवाना चाहिए था, यह गलत है। साथ ही शंकराचार्य को भी राजनीति नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा- संतों के बीच में कुछ राजनीतिक लोग भी एंट्री करना चाहते हैं, जो गलत है। संतों के बीच में राजनीति की जरूरत नहीं। शांडिल्य महाराज का निशाना सपा प्रमुख अखिलेश यादव और कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय पर था। रामानुजाचार्य ने कहा- अब भी कुछ नहीं बिगड़ा, क्षमा मांग लेनी चाहिए
जगतगुरु रामानुजाचार्य ने कहा- रामभद्राचार्य ने कौन-सा अच्छा काम किया है? हाथ में दंड लेकर, हमारे यहां खंडित मूर्ति की पूजा नहीं होती। ब्राह्मण का अंग भंग हो, तो पूजा नहीं होती। 4 शंकराचार्य 13 अखाड़े और 5 वैष्णवाचार्य संत पूजनीय वंदनीय है। उनका सम्मान होना चाहिए, प्रशासन को चाहिए था कि वह पालकी से आए थे। उनसे अनुरोध करते कि महाराज आप पालकी का त्याग कर दीजिए। हमारे साथ पैदल आइए, हम आपको सुरक्षित स्नान कराएंगे। अब भी कुछ नहीं बिगड़ा है, क्षमा याचना कर विवाद को विराम लगाए। प्रयागराज ही नहीं, दिल्ली में आंदोलन की जरूरत होगी तो संत समाज करने को तैयार है। देवकी नंदन ठाकुर- संतों के साथ मारपीट ठीक नहीं आगरा में देवकीनंदन ठाकुर ने कहा- ये मेरे के लिए धर्मसंकट का समय है। दोनों ही अपने हैं। एक तरफ तो शंकराचार्य जैसा भगवान है, दूसरी तरफ वो लोग भी हैं, जो बहुत बड़ी संख्या में स्नान के लिए आए लोगों की चिंता कर रहे थे। मैं सिर्फ इतना ही कहूंगा कि ऐसी सिचुएशन को बढ़ाना नहीं चाहिए। आपसी मतभेद भुलाकर प्यार से हर सनातनी को एक स्वर में बैठकर सुलझाना चाहिए, उसे उलझाना नहीं चाहिए। प्रशासन को भी चाहिए कि जिसके माथे पर तिलक हो, जिसके सिर पर शिखा हो और जिसने भगवाधारण किया हो, उसे आदर से रख सकते हैं। ऐसे मारपीट से ठीक नहीं है। अब मथुरा के संतों की बात महंत रामदास बोले- बटुक ब्राह्मणों को अपमान निंदनीय
महंत रामदास महाराज कहते हैं- शंकराचार्य महाराज का पद बड़ा है, वह हमारे सिंहस्थ हैं। वहीं, योगी महाराज भी उच्चस्थ हैं। पूरे यूपी को संभालते हैं। लेकिन, बटुक ब्राह्मणों का जो अपमान किया, वह बहुत निंदनीय है। ये सनातन के सेवक हैं। उनका अपमान क्यों किया गया? ये प्रशासन को बताना ही चाहिए। हमारे धर्म में आसानी से उंगली उठा दी जाती है। इस्लाम में मौलाना साहब, हाजी साहब पर उठाकर देखिए। ये जो शंकराचार्य का पद है, ये महादेव का पद है। ये सेवा, ब्रह्मचारी, भूदेव, वेदों की जानकारी वाला ब्राह्मण होता है। उनकी अपनी मान्यता है। शंकराचार्य का अनशन उचित नहीं, मगर ब्राह्मणों पर लाठी चलाना भी गलत
वृंदावन में परिक्रमा मार्ग के महंत अतुल कृष्ण महाराज ने कहा- मैं यही कहना चाहता हूं कि संत, महंत और गृहस्थ, इन्हीं बंटना नहीं चाहिए। ये जो प्रयागराज की धरती पर हो रहा, ये एक अलग राजनीति की तरफ जाता दिख रहा। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने जो अनशन किया, वो उचित नहीं था। पुलिस प्रशासन ने जो उनके ब्राह्मणों पर लाठी चलाई, ये भी गलत था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से निवेदन है कि इस खींचतान को पूरी तरह से खत्म करना चाहिए। काशी के संतों की बात स्वामी चक्रपाणि ने कहा- बटुकों की पूजा होनी चाहिए, न कि अत्याचार
स्वामी चक्रपाणि महाराज ने कहा- कुंभ और माघ मेला किसी एक व्यक्ति की देन नहीं, ऋषि-मुनियों और संत परंपरा की अमूल्य विरासत है। इसकी गरिमा बनाए रखना शासन, प्रशासन और संत समाज, तीनों की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने बटुकों के साथ हुई मारपीट और चोटी खींचने की घटना को निंदनीय और जघन्य अपराध बताया। कहा कि बटुकों की पूजा और सेवा होनी चाहिए, न कि उनके साथ अत्याचार। चोटी सनातन परंपरा का प्रतीक है। उस पर प्रहार सनातन की मर्यादा पर चोट है। उन्होंने कहा कि प्रयाग और काशी के लोग पाप-क्षय, दान-पुण्य और संत सेवा के लिए जाने जाते हैं। ऐसे पवित्र स्थलों पर किया गया, हर गलत कर्म ईश्वरीय न्याय से नहीं बच सकता। उन्होंने शासन से संतों और अर्चकों से माफी मांगने के लिए कहा। जितेंद्रानंद ने कहा- कोर्ट में ऐसे प्रमाण, उन्हें शंकराचार्य नहीं मान सकते
अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने कड़ा बयान दिया। कहा- कोर्ट में ऐसे प्रमाण मौजूद हैं, जिनके आधार पर अविमुक्तेश्वरानंद को शंकराचार्य नहीं माना जा सकता। ये हर बार पीटे जाते हैं, इस बार स्नान के दौरान अव्यवस्था फैला रहे थे। दस्तावेज के मुताबिक, जब तक शंकराचार्य पद के मामले में अंतिम फैसला नहीं हो जाता, तब तक न तो स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और न ही कोई अन्य व्यक्ति शंकराचार्य के रूप में नियुक्ति या पट्टाभिषेक कर सकता है। आदेश में यह भी कहा गया है कि अविमुक्तेश्वरानंद को शंकराचार्य के तौर पर किसी तरह की सुविधा देना कोर्ट की अवमानना माना जाएगा। यह मामला सुप्रीम कोर्ट में सिविल अपील के रूप में लंबित है। 26 साल में कई बार उन्होंने मेले में मारपीट की है। अब अयोध्या के संतों की बात हनुमानगढ़ी के पुजारी तुलसीदास बोले- वह कांग्रेस के इशारे पर साजिश कर रहे
अयोध्या के ज्योतिष भवन के आचार्य पंडित राकेश दास ने कहा- स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद श्रद्धा और सम्मान के प्रतीक हैं। वह गंगा स्नान करने के लिए किसी वाहन से नहीं, बल्कि पालकी से जा रहे थे। उनके साथ कुल 100 लोग थे। इन परिस्थितियों में उनको गंगा स्नान से रोकना किसी भी रूप में उचित नहीं था। हनुमानगढ़ी के पुजारी तुलसीदास कहते हैं- शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद कांग्रेस के इशारे पर सरकार के खिलाफ साजिश कर रहे हैं। महंत रामकुमार दास ने कहा- स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का पालकी पर सवार होकर गंगा स्नान के लिए जाने को कतई उचित नहीं कहना चाहिए। यह कल्पवास का माघ मेला है, न कि महाकुंभ का स्नान है। विश्व में इस प्रकार का आचरण किसी भी रूप में उचित नहीं। हनुमानगढ़ी की उज्जैनिया पट्टी के वरिष्ठ नागा शत्रुघ्न दास ने कहा- स्वामी और अविमुक्तेश्वरानंद के पास ज्ञान की कमी है, उनको सीताराम सीताराम जपना चाहिए। पढ़िए मौनी अमावस्या पर क्या हुआ था 18 जनवरी को माघ मेले में मौनी अमावस्या पर अविमुक्तेश्वरानंद पालकी में स्नान करने जा रहे थे। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की पालकी पुलिस ने रोक दी। पुलिस ने उनसे पैदल संगम जाने को कहा। शंकराचार्य के शिष्य नहीं माने और पालकी लेकर आगे बढ़ने लगे। इस पर शिष्यों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की शुरू हो गई। पुलिस ने कई शिष्यों को हिरासत में ले लिया था। पुलिस ने एक साधु को चौकी में भी पीटा था। इससे शंकराचार्य नाराज हो गए थे और शिष्यों को छुड़वाने पर अड़ गए। अफसरों ने उन्हें समझाने की कोशिश की, हाथ जोड़े, लेकिन वे नहीं माने। इसके बाद पुलिस ने शंकराचार्य के कई और समर्थकों को हिरासत में ले लिया था। शंकराचार्य की पालकी को खींचते हुए संगम से 1 किमी दूर ले जाया गया। इस दौरान पालकी का क्षत्रप भी टूट गया। शंकराचार्य स्नान भी नहीं कर पाए। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बारे में जानिए ———————- ये खबर भी पढ़ें…. अविमुक्तेश्वरानंद को चेतावनी- माघ मेले से बैन कर देंगे, योगी बोले- कई कालनेमि सनातन को कमजोर करने की साजिश रच रहे प्रयागराज में अविमुक्तेश्वरानंद और माघ मेला प्रशासन के बीच टकराव बढ़ता जा रहा है। 48 घंटे के अंदर प्रशासन ने अविमुक्तेश्वरानंद को दूसरा नोटिस भेजा है। इसमें मौनी अमावस्या के दिन बैरियर तोड़ने और जबरन भीड़ में बग्घी घुसाने को लेकर सवाल किए हैं। पढे़ं पूरी खबर…