हरियाणा में रोहतक में शिव मंदिर से जुड़ा निर्माण रोकने पहुंचे पुलिसकर्मियों को ग्रामीणों ने घेर लिया। तीखी नोकझोंक हुई। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पुलिस कर्मी बिना कागजात के पहुंचे थे। उन्हें जिला पार्षद ने फोन करके भेजा था। यह भी आरोप है कि पुलिस कर्मियों ने आते ही ग्रामीणों को धमकाया कि काम बंद करो, नहीं तो जेल में बंद कर देंगे। मौके पर कई महिलाएं भी मौजूद थी, वे भी विरोध में उतर आई। इससे हंगामा खड़ा हो गया। ग्रामीणों का कहना था कि पुलिसकर्मी के पास कोई स्टे या निर्माण रोकने का कागज नहीं था। इसलिए पुलिस को इस मामले में पड़ने का अधिकार नहीं है। वह केवल जिला पार्षद के कहने पर यहां आ धमके थे। काफी देर तक हंगामा चलता रहा। सूचना देकर सरपंच प्रतिनिधि को मौके पर बुलाया गया। जब डीजीपी और आईजी से शिकायत करने की बात कई तो पुलिस कर्मी वहां से लौट गए। उधर, इस मामले की शिकायत डीजीपी से की गई है, जिसमें जिला पार्षद और चौकी इंचार्ज से जान का खतरा जताया गया है। यहां सिलसिलेवार ढंग से जानिए पूरा मामला… डीजीपी से शिकायत करने की बात कही तो लौटे पुलिसकर्मी
अमित कुमार ने कहा कि यह मामला सिविल का है, जिसमें पुलिस को रोकने का कोई अधिकार नहीं है। उनकी दादालाई शिव मंदिर की जमीन है, जिस पर वह काम कर रहे हैं। केवल जिला पार्षद के कहने पर पुलिस का आकर धमकी देना सही नहीं है। उन्होंने जब मामले की शिकायत डीजीपी और आईजी से करने की बात कही तो पुलिस कर्मी वहां से लौट गए। जिला पार्षद और चौकी इंचार्ज से जताया जान का खतरा
अमित ने डीजीपी अजय सिंघल के नाम पत्र लिखते हुए शिकायत की कि गांव खरावड़ के जिला पार्षद धीरज मलिक और चौकी इंचार्ज परमजीत जमीन को जबरदस्ती अपनी पावर का गलत इस्तेमाल करके कब्जा करना चाहते है। जिला पार्षद और चौकी इंचार्ज परमजीत से उन्हें जान माल का खतरा है। उन्हें आशंका है कि पुलिसकर्मी उन्हें और उनके परिवार को झूठे केस में फंसा सकते हैं। इस मामले में उचित कार्रवाई की जाए।
रोहतक में मंदिर का निर्माण रोकने पहुंचे पुलिसकर्मियों को घेरा:जेल में बंद करने की धमकी देने पर नोकझोंक; DGP-IG का नाम लिया तो लौट गए
