‘साहब…अब कुछ नहीं बचा, उन्हें हमें सौंप दीजिए’:वेंटिलेटर वाले मरीज के परिजनों की डॉक्टरों से गुहार; मृतक के बेटे से मांगा भागीरथपुरा का आधार

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इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। शनिवार को एक और महिला सुनीता वर्मा की मौत हो गई। इसके बाद मृतकों की संख्या बढ़कर 21 हो गई है। 12 मरीज अब भी ICU में हैं। सभी की हालत गंभीर बनी हुई है। चार मरीज तो वेंटिलेटर पर हैं। उन्हें इसी स्थिति में 8 से 10 दिन हो चुके हैं, लेकिन कोई खास रिस्पॉन्स नहीं मिल पाया है। डॉक्टरों की एक टीम लगातार उनकी मॉनिटरिंग कर रही है। परिजन बार-बार पूछ रहे हैं कि हालत में कब तक सुधार होगा। डॉक्टरों का जवाब होता है कि धीरे-धीरे ही सुधार संभव है, लेकिन स्थिति अभी भी चिंताजनक है। इस पर परिजन कहते हैं कि हमसे उनकी यह स्थिति देखी नहीं जाती है। अब कुछ भी नहीं बचा है, उन्हें इसी हालत में हमें सौंप दीजिए। इसी तरह, धार के एक रिटायर्ड पुलिसकर्मी की भी दूषित पानी से मौत हो चुकी है। मुआवजे के लिए उनके बेटे से आधार कार्ड में भागीरथपुरा का पता मांगा जा रहा है। इस पर उनका कहना है कि बीमारी आधार कार्ड देखकर नहीं आई थी। वे यहां आए थे और अपनी जान गंवा बैठे। अब आधार कार्ड में भागीरथपुरा का पता कहां से लाएं? वहीं, शनिवार को भागीरथपुरा में डायरिया के 19 मरीज और आए हैं। इनमें से 2 को हॉस्पिटल रेफर किया। पूरे मामले में अब तक 420 मरीज एडमिट हो चुके हैं। इनमें से 379 को डिस्चार्ज कर दिया है। अभी 41 मरीज एडमिट हैं। डॉक्टर्स बोले-स्थिति नाजुक, घर ले जाना जोखिम भरा
भले ही मरीज के इलाज का सारा खर्च शासन द्वारा वहन किया जा रहा है लेकिन परिजनों की हिम्मत जवाब देने लगी है। कुछ मरीज के परिजन उन्हें घर ले जाना चाहते हैं। जिस पर पहले तो डॉक्टर हेल्थ प्रोटोकॉल, केस में शासन की निगरानी का हवाला देते रहे लेकिन अब स्थिति अलग है। उन्हें यह बताया जा रहा है कि स्थिति बहुत नाजुक है। अगर ऐसी स्थिति में घर ले जाया गया तो वह जोखिम भरा रहेगा। साहब, जैसी हालत वैसे ही हमें सौप दो
परिजन का भी अपना मत है कि यूं भी उनकी हालत में अब कोई सुधार नहीं हो रहा है। कुछेक के परिजन तो यहां तक बोल चुके हैं कि साहब अब उनकी जैसी हालत है, वैसी हालत में ही हमें सौंप दो। वेंटिलेटर पर लगी ऑक्सीजन, अलग-अलग नली, कई तरह के सिस्टम, इस प्रकार की स्थिति देखी नहीं जाती है। इससे बेहतर है कि हम उन्हें घर ही ले जाए। इसके लिए लिखकर देने को भी राजी हैं कि हम इन्हें अपनी जिम्मेदारी पर घर ले जा रहे हैं। किसी की किडनी खराब, तो किसी का लिवर
एडमिट होने के दौरान इन मरीजों को उल्टी, दस्त हुए थे जिससे शरीर में पानी की मात्रा काफी कम हो गई थी। इसके बाद हालत खराब होती गई। फिर किसी की किडनी खराब हुई तो किसी का लिवर। किसी मरीज को तो इसका असर ब्रेन तक हो गया है। डॉक्टरों का अपना तर्क है कि कुछ को पहले से बीमारी थी। आज इनमें से कुछ के परिजन अपने मुखिया को डिस्चार्ज करवाकर घर ले जाने की तैयारी में है। मार्केटिंग एक्जीक्यूटिव की दोनों किडनी खराब
एक मरीज सतीश अग्रवाल अभी आईसीयू में हैं। वे मार्केटिंग एक्जीक्युटिव है। उनका भागीरथपुरा में इसी काम से आना-जाना था। इसी दौरान वे भी दूषित पानी का शिकार हो गए। पहले उन्हें एक प्राइवेट हॉस्पिटल में एडमिट किया गया था। फिर पता चला कि किडनी खराब है तो एक अन्य हॉस्पिटल में रेफर किया गया। वहां उनकी हालत में और गिरावट आई। अब उनकी दोनों किडनियां खराब हो चुकी है और डायलिसिस चल रहा है। परिवार की परेशानी यह है कि चूंकि वे भागीरथपुरा में नहीं रहते हैं इसलिए उन्हें शासन इस मामले में शामिल ही नहीं कर रहा है। उन्हें तो यह तक कहा गया कि कैसे मान ले कि भागीरथपुरा के दूषित पानी से ही उनकी हालत बिगड़ी। नजदीकी लोगों का कहना है कि वे तो पूरी तरह स्वस्थ थे और कोई बीमार नहीं थे लेकिन यकीन नहीं किया जा रहा है। आधार कार्ड देखकर नहीं आती बीमारी
ऐसा ही एक मामला धार के बुजुर्ग ओमप्रकाश शर्मा का है, जिनकी मौत इसी हफ्ते में हुई थी। शासन ने उन्हें भी मुआवजा सूची में नहीं माना है। उनके बेटे गौरव शर्मा ने कहा कि वे पूरी तरह स्वस्थ है। भागीरथपुरा में अपने एक परिचित के यहां गए थे। इसी दौरान दूषित पानी पीने के बाद उनकी हालत खराब हुई और मौत हो गई। गौरव का कहना है अधिकारी कहते हैं कि पिताजी के भागीरथपुरा का आधार कार्ड बताइए। क्या पीड़ितों या दिवंगतों का भागीरथपुरा निवासी होना जरूरी है? क्या वायरस आधार कार्ड देखकर ही किसी पर अटैक करता है? प्रत्येक नागरिक को दिए जाएंगे स्वास्थ्य कार्ड
शनिवार को मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने समीक्षा बैठक की। जिसमें कहा कि वर्तमान में स्वास्थ्य की दृष्टि से स्थिति तेजी से सामान्य हो रही है और नियंत्रण में है। फिलहाल कोई भी गंभीर (सीरियस) मामला सामने नहीं है। इसके बावजूद एहतियातन भागीरथपुरा क्षेत्र के प्रत्येक परिवार का स्वास्थ्य परीक्षण कराने के लिए अभियान शुरू किया जा रहा है। क्षेत्र के लगभग 50 से 60 हजार नागरिकों के स्वास्थ्य परीक्षण के लिए संपूर्ण स्वास्थ्य दल तैनात रहेगा। जांच के दौरान यदि किसी प्रकार की समस्या पाई जाती है तो तत्काल उपचार और फॉलो-अप सुनिश्चित किया जाएगा। प्रभावित नागरिकों को स्वास्थ्य कार्ड भी प्रदान किए जाएंगे। नागरिकों की विभिन्न प्रकार की जांचें नि:शुल्क की जाएंगी। नए बोरिंग खनन पर लगेगी रोक
इंदौर में नए बोरिंग खनन पर रोक लगाया जाएगा। वहीं, भागीरथपुरा क्षेत्र में पाइपलाइन का काम प्रगति पर है। लगभग 30 प्रतिशत क्षेत्र में पाइपलाइन डाली जा चुकी है और उसकी टेस्टिंग भी पूरी हो चुकी है। जल के सैंपल लेकर लगातार जांच की जा रही है। पूरी तरह पीने योग्य होने की पुष्टि के बाद तीन दिन के भीतर नर्मदा का पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा। भागीरथपुरा में 114 सरकारी और 80 से अधिक निजी ट्यूबवेल हैं। जल परीक्षण में पानी पीने योग्य नहीं पाए जाने पर सभी ट्यूबवेलों में क्लोरीनेशन कराया गया है। मामले से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… 1. इंदौर दूषित पानी से 21वीं मौत:एक और महिला ने दम तोड़ा, अभी भी 4 मरीज वेंटिलेटर पर, 11 आईसीयू में भर्ती 2. भागीरथपुरा के वो 3 जहरीले दिन, जिन्होंने छीनीं 20 जानें:पानी में थे बेहद बारीक कीड़े और बदबू…लोग पीते रहे 3. हमें भी शुद्ध पानी उपलब्ध कराओ ‘सरकार’:भागीरथपुरा के दिव्यांगों की गुहार- हम बोल और सुन नहीं सकते 4. क्या हकीकत छिपा रहा इंदौर प्रशासन?:20 की जान गई, मुआवजा 18 को…सरकारी आंकड़े 4 पर सीमित क्यों? 5. बिना पोस्टमॉर्टम कई शवों का हुआ अंतिम संस्कार: भागीरथपुरा दूषित पानी से मौत कैसे होगी साबित