12वीं फेल महंत करता था कॉलेज लड़कियों की डिमांड:दिन में मंत्री-विधायकों के साथ घूमता, रात में हिस्ट्रीशीटर बदमाशों के साथ होती थी शराब पार्टी

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क्राइम फाइल्स के पहले पार्ट में अब तक आपने पढ़ा, रीवा के एक कॉलेज में पढ़ने वाली लड़की काजल ने एक कथावाचक पर रेप का आरोप लगाया। 28 मार्च 2022 को कॉलेज की फीस जमा कराने के बहाने काजल को हिस्ट्रीशीटर विनोद पांडे ने भरोसे में लेकर उसे शहर के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले सर्किट हाउस तक पहुंचा दिया था। वहां कथावाचक संत, उसका चेला और अन्य लोग पहले से मौजूद थे। सर्किट हाउस में संत ने काजल के साथ रेप किया। धमकियां देकर उसे चुप कराने की कोशिश की गई। मौका पाकर उनके चंगुल से छूटकर भागी काजल और दो दोस्तों के साथ थाने पहुंची। मामला खुलने की भनक लगते ही आरोपी फरार हो गए। इसके बाद ये हाईप्रोफाइल मामला जल्द ही पूरे प्रदेश में सुर्खियों में छा गया। रीवा के सबसे सुरक्षित वीआईपी सर्किट हाउस में हुई इस घटना ने रसूख और आस्था के मुखौटे के पीछे छिपे काले चेहरे को उजागर कर दिया था। सवाल यही था कि वीआईपी ठिकाने में यह सब कैसे हुआ, जिस कथावाचक की नेता-मंत्री भी पैर छूते थे, उस संत की हकीकत क्या थी। क्या कानून रसूखदार आरोपी और संत को सजा दिला पाया? पढ़िए पार्ट-2 काजल की शिकायत पर पुलिस ने तुरंत एक्शन लिया। संत सीताराम दास, हिस्ट्रीशीटर विनोद पांडे और उनके चेले धीरेंद्र मिश्रा समेत नौ लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की गई। पुलिस के सामने पहला और सबसे बड़ा सवाल यह था कि शहर के सबसे सुरक्षित गेस्ट हाउस में एक कुख्यात अपराधी के नाम पर कमरा कैसे बुक हो गया? जांच की पहली कड़ी में ही सर्किट हाउस का रजिस्टर खंगाला गया। कमरा नंबर 4, विनोद पांडे के नाम पर बुक था। यह नाम रीवा के अपराध जगत के लिए नया नहीं था। विनोद पांडे, शहर का वो हिस्ट्रीशीटर था जिसके नाम हत्या, हत्या का प्रयास, अड़ीबाजी और बलात्कार जैसे 36 से ज्यादा संगीन मामले दर्ज थे। वह कई साल जेल की हवा भी खा चुका था। ऐसे शख्स को वीआईपी सर्किट हाउस में कमरा मिलना, प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था पर एक बड़ा तमाचा था। जांच में यह भी साफ हो गया कि इस पूरी साजिश का मास्टरमाइंड विनोद पांडे ही था। भगवा चोले के पीछे छिपा था असली चेहरा
अब पुलिस का ध्यान मुख्य आरोपी, यानी भगवा चोला पहने उस ‘संत’ पर था। उसकी पहचान महंत सीताराम दास उर्फ समर्थ त्रिपाठी के रूप में हुई। सीताराम का नाम सामने आते ही उसकी पूरी जन्मकुंडली खुल गई। रीवा के गुढ़ का रहने वाला सीताराम 12वीं भी पास नहीं कर पाया था। उसके पिता एक सिक्योरिटी गार्ड थे और मां घर पर टिफिन सेंटर चलाती थीं। परिवार ने उसे बेहतर भविष्य के लिए भोपाल के एक पॉलिटेक्निक कॉलेज में दाखिला दिलाया, लेकिन पढ़ाई में उसका मन कभी नहीं लगा। जब हर तरफ से नाकामी हाथ लगी, तो माता-पिता उसे अयोध्या के एक जाने-माने संत के पास ले गए। यहीं से उसके ‘संत’ बनने का सफर शुरू हुआ। 7 सितंबर 2020 को वह गोंडा के एक मंदिर का महंत बन गया। महंत बनते ही उसकी शैतानी बुद्धि जाग गई और उसकी नजर मंदिर ट्रस्ट की 120 बीघा कीमती जमीन पर पड़ गई। उसने अपने ही एक साथी साधु सम्राट दास के साथ मिलकर जमीन हथियाने की खौफनाक साजिश रची। उसने एक प्रोफेशनल शूटर को हायर किया और अपने ही साथी सम्राट दास पर गोली चलवा दी। छवि सुधारने नेताओं-अफसरों से मेलजोल बढ़ाया
प्लान के मुताबिक सम्राट दास को गोली लगी और आरोप एक तीसरे व्यक्ति अमर सिंह पर डाल दिया गया। लेकिन पुलिस ने महज एक हफ्ते में ही पूरी साजिश का पर्दाफाश कर दिया। महंत सीताराम दास और उसके साथी पकड़े गए और उसे जेल जाना पड़ा। जेल जाने से उसकी काफी बदनामी हुई, जिसके बाद वह वापस रीवा लौट आया। रीवा आकर उसने अपनी छवि सुधारने का एक नया खेल शुरू किया। उसने इलाके के चर्चित नेताओं, अफसरों और अपराधियों से मेलजोल बढ़ाया। बड़े-बड़े साधु-संतों और राजनेताओं के साथ अपनी तस्वीरें खिंचवाकर उन्हें अपनी ढाल बनाया और खुद को एक बड़े कथावाचक और प्रभावशाली संत के रूप में स्थापित करने लगा। अप्रैल 2022 में रीवा के एक बड़े शॉपिंग मॉल के उद्घाटन के मौके पर सीताराम के गुरु, अयोध्या के प्रसिद्ध संत रामविलास वेदांती की कथा का आयोजन होना था। सीताराम इसी कथा की तैयारियों के सिलसिले में 28 मार्च को रीवा आया था और अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों से मुलाकात कर रहा था। इसी दौरान, विनोद पांडे ने उसके रुकने का इंतजाम सर्किट हाउस में करवाया था। यहां पहुंचकर सीताराम ने अपनी असली रंगत दिखाई और विनोद से शराब और लड़की की डिमांड की। अपने ‘आका’ की इसी डिमांड को पूरा करने के लिए विनोद पांडे ने कॉलेज की स्टूडेंट काजल को अपने जाल में फंसाया। विनोद और काजल के बीच हुई बातचीत की कॉल रिकॉर्डिंग ने इस पूरी साजिश की परतें खोलकर रख दीं। विनोद: अब इतनी दूर आई हो तो मुलाकात नहीं करोगी? काजल: तो फिर आप ही मिलने आ जाइए। विनोद: बेटा, मैं रोड में नहीं मिलता किसी से। आपको मेरे बारे में पता ही नहीं है। काजल: फिर क्या करें? मैं अकेले कहीं गई नहीं हूं। विनोद: आ जाओ बेटा, बोला था तुम्हारे लिए लहंगा दिलाने के लिए। काजल: मुझे बता दो, मैं यहीं ले लूंगी। इतना टाइम हो गया है, लग रहा है जाऊं घर। विनोद: घर में तो रोज रहते हो। आज आए हो तो रुको, आपका इतना बड़ा जलवा हो जाएगा। समदड़िया गोल्ड में जो कार्यक्रम हो रहा है, होर्डिंग लगी है-देख रहे हो? काजल: हां, हां, हां। विनोद: जो संत जी हैं जिनकी फोटो लगी है, उनके नाती मेरे पास आए हुए हैं। कलेक्टर, एसपी, आईजी, मंत्री, विधायक सब उनके पैर छूते हैं। मिलवाता हूं उनसे। एक स्तर का जीवन शुरू करो। भाग रही हो, घर जाऊंगी। काजल: घर की बात नहीं है, कहां रुकेंगे? विनोद: अरे यार, आप आओ तो एक बार देखकर मस्त हो जाओगे। आपको अलग रूम ही मिलेगा। विनोद ने बड़े-बड़े लोगों का नाम लेकर और एक बेहतर जिंदगी का सपना दिखाकर काजल को सर्किट हाउस आने के लिए राजी कर लिया। जब काजल वहां पहुंची, तो उसे कमरे में बंद कर दिया गया और फिर ‘संत’ के चोले में छिपे शैतान ने अपनी हवस का शिकार बनाया। घटना के बाद बाबा और उसके साथी फरार हो गए। पुलिस ने आरोपियों को पकड़ने के लिए कई टीमें बनाईं। सीसीटीवी फुटेज और कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) के आधार पर उनकी लोकेशन ट्रेस की जाने लगी। फरारी के दौरान आरोपी महंत सीताराम ने अपनी पहचान छिपाने की कोशिश की। वह अपने लंबे बालों की वजह से आसानी से पहचाना जा सकता था, इसलिए उसने सिर मुंडवा लिया। वह सिंगरौली के एक सैलून में सिर मुंडवाने पहुंचा ही था कि मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने घेराबंदी कर उसे दबोच लिया। इसके बाद एक-एक कर सभी आरोपी विनोद पांडे, धीरेंद्र मिश्रा, अंशुल मिश्रा, मोनू पयासी और संजय त्रिपाठी भी पुलिस की गिरफ्त में आ गए। गिरफ्तारी के बाद सभी आरोपी खुद को निर्दोष बताते रहे। सीताराम ने कहा कि उसे साजिश के तहत फंसाया जा रहा है। लेकिन पुलिस के पास पुख्ता सबूत थे। सबसे बड़ा सबूत पीड़िता द्वारा हिम्मत करके रिकॉर्ड किया गया एक वीडियो था, जिसे पुलिस ने रिकवर कर लिया। वीडियो में सर्किट हाउस के कमरा नंबर 4 में आरोपी सीताराम तीन लोगों के साथ शराब पीता हुआ साफ दिख रहा था। वीडियो में भगवा पहने सीताराम के साथ काली शर्ट में धीरेंद्र मिश्रा और नीली शर्ट में विनोद पांडे मौजूद थे। टेबल पर शराब की बोतलें और खाने-पीने का सामान बिखरा पड़ा था। पुलिस की पूछताछ, कॉल रिकॉर्ड्स और लोकेशन ने पूरी साजिश को एक धागे में पिरो दिया। किसने लड़की को फोन किया, किसने उसे कार से बुलाया, किसने शराब मंगवाई और किसने कमरे का दरवाजा बंद किया—हर कड़ी एक-दूसरे से जुड़ती चली गई। यह मामला रीवा की विशेष पॉक्सो अदालत में चला। करीब तीन साल तक चली सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 22 गवाह पेश किए और 140 दस्तावेज अदालत के सामने रखे। डीएनए रिपोर्ट, सीसीटीवी फुटेज, कॉल रिकॉर्ड और पीड़िता के वीडियो जैसे तकनीकी साक्ष्यों ने आरोपियों के खिलाफ आरोपों को लोहे की तरह मजबूत कर दिया। आखिरकार, अदालत ने फैसला सुनाया। सबूतों और गवाहों के आधार पर, अदालत ने महंत सीताराम दास उर्फ समर्थ त्रिपाठी, विनोद पांडे, धीरेंद्र मिश्रा, अंशुल मिश्रा और मोनू पयासी को सामूहिक बलात्कार और अन्य धाराओं में दोषी पाया। अदालत ने पांचों दोषियों को शेष प्राकृतिक जीवन तक आजीवन कारावास (यानी मरते दम तक जेल) की सजा सुनाई। साथ ही, सभी पर एक-एक लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया गया। वहीं, चार अन्य आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया। इनमें वह लड़की भी शामिल थी, जिस पर फरारी के दौरान महंत की मदद करने का आरोप था। जांच में पता चला कि वह सीताराम की मंगेतर थी और उसे इस अपराध के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। इसी तरह, संजय त्रिपाठी, तौसीफ खान और रविशंकर त्रिपाठी भी आरोपों से बरी हो गए। क्राइम फाइल्स पार्ट-1 भी पढ़ें… आशीर्वाद के बहाने सर्किट हाउस में गैंगरेप मध्य प्रदेश क्राइम फाइल्स में आज बात रीवा के उस चर्चित सर्किट हाउस कांड की जिसने प्रदेश की राजनीति और समाज में भूचाल ला दिया था। यह एक ऐसी घटना थी जिसने तथाकथित धर्मगुरुओं के चोले के पीछे छिपे स्याह सच और रसूखदारों की ताकत के भयावह गठजोड़ को उजागर किया था। पढ़ें पूरी खबर…