मध्यप्रदेश के सबसे प्रदूषित शहर सिंगरौली में घिरौली कोल ब्लॉक के लिए 6 लाख पेड़ काटे जाने को लेकर कांग्रेस और स्थानीय लोग विरोध कर रहे हैं। यह मामला अब अदालत तक भी पहुंच गया है। इस पेड़ कटाई के मुद्दे पर दैनिक भास्कर ने सिंगरौली जिले की प्रभारी मंत्री और मध्यप्रदेश की पीएचई मंत्री संपतिया उइके से सवाल किए। सवाल: आप सिंगरौली की प्रभारी मंत्री हैं। वहां 6 लाख पेड़ काटे जा रहे हैं। इस पर आप क्या कहेंगी? पीएचई मंत्री: सिंगरौली में बार-बार यह कहा जा रहा है कि 6 लाख पेड़ काटे गए हैं। मैं कल ही सिंगरौली से आई हूं। वहां चर्चा में यह सामने आया कि 6 लाख पेड़ नहीं कटे हैं, बल्कि अब तक मात्र 33 हजार पेड़ ही काटे गए हैं। 6 लाख पेड़ों की कटाई प्रस्तावित है, लेकिन अभी इतने पेड़ नहीं कटे हैं। विकास कार्यों के तहत आवश्यकता के अनुसार धीरे-धीरे कटाई होगी। जो भी पेड़ काटे गए हैं, वे सभी नियमों और प्रावधानों के तहत काटे गए हैं। यह कहना कि 6 लाख पेड़ कट चुके हैं, सही नहीं है। 6 लाख पेड़ प्रस्तावित हैं, कटे नहीं हैं। दो साल की उपलब्धियां गिनाईं पीएचई मंत्री संपतिया उइके ने भोपाल के बाणगंगा स्थित जल भवन में मोहन सरकार के दो साल पूरे होने पर अपने विभाग की उपलब्धियां गिनाईं। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने कहा कि जल जीवन मिशन के तहत प्रदेश में हर घर जल का सपना तेजी से साकार हो रहा है। सरकार का स्पष्ट फोकस हर परिवार तक सुरक्षित और शुद्ध पेयजल पहुंचाना है। 18 दिसंबर 2025 की स्थिति में प्रदेश के 81 लाख 21 हजार ग्रामीण परिवारों (72.87%) को घर-घर नल से शुद्ध पानी मिल रहा है। इसे अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक माना जा रहा है। बुरहानपुर बना देश का पहला प्रमाणित हर घर जल जिला भारत सरकार ने बुरहानपुर को देश का पहला प्रमाणित हर घर जल जिला घोषित किया है। वहीं, प्रदेश की सभी जल परीक्षण प्रयोगशालाओं का NABL प्रमाणीकरण पूरा होने के साथ मध्यप्रदेश इस क्षेत्र में देश में अग्रणी बन गया है। स्वच्छ जल से सुरक्षा में टॉप-3, राष्ट्रपति पुरस्कार भी मिला भारत सरकार के “स्वच्छ जल से सुरक्षा” अभियान में मध्यप्रदेश को देश में तीसरा स्थान मिला। इसके साथ ही छिंदवाड़ा की अनिता चौधरी को जल जीवन मिशन के तहत जल योद्धा श्रेणी में राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित किया गया। दो साल में बदली गांवों की तस्वीर पिछले दो सालों में 13.69 लाख से अधिक नए घरेलू नल कनेक्शन दिए गए। प्रदेश के 10,440 गांवों को हर घर जल ग्राम घोषित किया जा चुका है। वहीं, 64 गांवों में पायलट आधार पर 24×7 जल प्रदाय की व्यवस्था लागू की गई है। इसके अलावा 15,238 नए हैंडपंप और नलकूप स्थापित किए गए हैं। उज्जैन संभाग के सभी जिलों में एकल नल जल योजनाएं 100% पूरी हो चुकी हैं, जिससे 7 लाख से अधिक परिवारों को लाभ मिला है। कानून, तकनीक और डिजिटल सिस्टम पर जोर पीएचई मंत्री ने बताया कि बोरवेल हादसों की रोकथाम के लिए बोरवेल अधिनियम लागू करने वाला मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है। योजनाओं की निगरानी के लिए जल रेखा मोबाइल एप और शिकायत निवारण के लिए जल दर्पण पोर्टल शुरू किया गया है। नल जल योजनाओं के 100% स्रोतों और टंकियों की जियो-टैगिंग, इन्वेंटरी एवं ट्यूबवेल मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर, ई-प्रबंधन और ई-ऑफिस सिस्टम के माध्यम से विभाग का कामकाज पूरी तरह डिजिटल किया गया है। सीएम हेल्पलाइन में विभाग लगातार ग्रेड ‘A’ में बना हुआ है। महिलाओं और बच्चों को सीधा फायदा घर तक पानी पहुंचने से महिलाओं का समय बचा है और बालिकाओं की स्कूल उपस्थिति में वृद्धि हुई है। बारिश के मौसम में जलजनित बीमारियों के मामले नगण्य रहे हैं। 10 लाख से अधिक जल नमूनों की जांच की गई है और महिलाओं को फील्ड टेस्ट किट (FTK) से पानी जांचने का प्रशिक्षण दिया गया है। तीन साल में एमपी के हर घर तक पहुंचेगा नल का जल अगले तीन सालों में सरकार का लक्ष्य 100% ग्रामीण परिवारों को नल कनेक्शन देना, सभी गांवों को हर घर जल प्रमाणित करना और जनजातीय क्षेत्रों में मिशन को तेजी से लागू करना है। साथ ही जल योजनाओं में नवीकरणीय ऊर्जा, 24×7 जल आपूर्ति और सतही स्रोतों से पेयजल उपलब्ध कराने की दिशा में भी काम किया जाएगा।
मंत्री संपतिया बोलीं-सिंगरौली में मात्र 33 हजार पेड़ कटे:लक्ष्य 6 लाख पेड़ काटने का, जरूरत के अनुसार धीरे-धीरे कटाई होगी
