मध्यप्रदेश का परिवहन विभाग बीते दो सालों में आम लोगों के लिए पहले से कहीं ज्यादा आसान, पारदर्शी और तकनीक आधारित बन गया है। लाइसेंस, परमिट और फिटनेस जैसी सेवाओं के लिए अब दफ्तरों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं रह गई है। राज्य सरकार के दो वर्ष पूरे होने पर सोमवार को भोपाल के मिंटो हॉल में आयोजित पत्रकार वार्ता में परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह ने विभाग की उपलब्धियों का ब्योरा दिया। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य बन गया है, जहां परिवहन विभाग की लगभग सभी सेवाएं पूरी तरह फेसलेस मोड में उपलब्ध कराई जा रही हैं। देश का पहला फेसलेस परिवहन विभाग बना मध्यप्रदेश
परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह ने बताया कि आम जनता की सुविधा को ध्यान में रखते हुए विभाग की अधिकांश सेवाएं अब ‘वाहन’ और ‘सारथी’ पोर्टल के जरिए ऑनलाइन दी जा रही हैं। ड्राइविंग लाइसेंस, वाहन पंजीयन, परमिट और अन्य सेवाओं के लिए लोगों को आरटीओ कार्यालयों में लाइन लगाने की जरूरत नहीं पड़ रही। मध्यप्रदेश इस मामले में देश का पहला राज्य बन गया है, जहां परिवहन विभाग की सेवाएं पूरी तरह फेसलेस तरीके से संचालित हो रही हैं। एमपी ऑनलाइन से गांव-गांव तक पहुंची सेवाएं
ऑनलाइन सेवाओं को और अधिक सुलभ बनाने के लिए एमपी ऑनलाइन सेंटर्स को भी परिवहन सेवाओं के लिए मान्यता दी गई है। मंत्री ने बताया कि प्रदेश में 1.25 लाख से अधिक सेवा केंद्रों के माध्यम से नागरिक परिवहन विभाग की सुविधाओं का लाभ ले रहे हैं। इससे खासकर ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों को बड़ी राहत मिली है। बस परमिट की समस्या सुलझाने नया ढांचा
यात्री बसों के परमिट को लेकर लंबे समय से आ रही दिक्कतों के समाधान के लिए सरकार ने संभागीय आयुक्त राजस्व की अध्यक्षता में प्रादेशिक परिवहन प्राधिकरण का गठन किया है। इसका उद्देश्य बस संचालन को सुचारू बनाना और यात्रियों को समय पर सुरक्षित परिवहन उपलब्ध कराना है। इलेक्ट्रिक और सीएनजी वाहनों को बढ़ावा
परिवहन मंत्री ने बताया कि पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए इलेक्ट्रिक वाहनों पर मोटरयान कर में पूरी छूट दी गई है। वहीं, सीएनजी वाहनों पर कर में 1 प्रतिशत की छूट का प्रावधान किया गया है। इससे लोगों को स्वच्छ ईंधन वाले वाहनों की ओर प्रोत्साहन मिलेगा और प्रदूषण कम करने में मदद मिलेगी। पुराने वाहन स्क्रैप करने पर मिलेगी छूट
सरकार ने पुराने वाहनों को स्क्रैप कराने के बदले नए वाहन खरीदने पर 50 प्रतिशत तक की छूट देने का प्रावधान किया है। मंत्री ने कहा कि इससे सड़कों पर पुराने और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की संख्या घटेगी और आधुनिक व सुरक्षित वाहनों को बढ़ावा मिलेगा। ड्राइविंग ट्रेनिंग और फिटनेस जांच पर फोकस
प्रदेश में सड़क सुरक्षा को मजबूत करने के लिए प्रादेशिक, संभागीय और जिला स्तर पर त्रि-स्तरीय ड्राइविंग प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने का निर्णय लिया गया है। इसके साथ ही वाहनों की फिटनेस जांच को पूरी तरह पारदर्शी और मानव हस्तक्षेप रहित बनाने के लिए 8 जिलों ग्वालियर, इंदौर, भोपाल, जबलपुर, सतना, सिंगरौली, उज्जैन और देवास में 16 ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन संचालित किए जा रहे हैं। बस संचालन और निगरानी के नए प्रयोग
मंत्री ने बताया कि निजी बस ऑपरेटर तय रूट और समय-सारणी के अनुसार बसों का संचालन कर रहे हैं, जिसकी निगरानी परिवहन विभाग और ट्रैफिक पुलिस कर रही है। इसके अलावा ‘मध्यप्रदेश यात्री परिवहन एवं इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड’ नाम से राज्य स्तरीय होल्डिंग कंपनी बनाई गई है। बस स्कीम के तहत पहले चरण में इंदौर के आसपास 50 से 60 किलोमीटर क्षेत्र में रूट चिह्नित किए जा रहे हैं। प्रदेश की सभी बसों की बेहतर मॉनिटरिंग के लिए इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) स्थापित करने का प्रस्ताव भी रखा गया है। मंत्री ने कहा कि इससे यात्री सुरक्षा, समय पालन और सेवा की गुणवत्ता में बड़ा सुधार होगा। परिवहन मंत्री के मुताबिक, बीते दो वर्षों में उठाए गए ये कदम न सिर्फ विभाग की कार्यप्रणाली बदल रहे हैं, बल्कि आम नागरिकों के लिए परिवहन सेवाओं को ज्यादा आसान, सुरक्षित और भरोसेमंद बना रहे हैं।
MP बना देश का पहला फेसलेस परिवहन विभाग:दो साल में बदली आरटीओ की तस्वीर; परिवहन मंत्री बोले- सेवाएं पूरी तरह ऑनलाइन
