मां-पिता का सिर फोड़ा, आरी से काटकर 6 टुकड़े किए:यूपी में इंजीनियर बेटे ने मुस्लिम पत्नी के लिए मार डाला; नमाज भी पढ़ता था

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जौनपुर में मुस्लिम पत्नी के लिए इकलौते इंजीनियर बेटे ने मां-बाप की हत्या कर दी। माता-पिता का सिर खलबट्‌टे (इमाम दस्ता) से कूच दिया। फिर आरी से काटकर दोनों शवों के 6 टुकड़े किए। शव के टुकड़ों और अवशेष 7 बोरियों में भरकर कार से गोमती नदी के किनारे पहुंचा। उसने बारी-बारी से सभी बोरियां नदी में फेंक दी। दरअसल, इंजीनियर बेटे ने एक मुस्लिम युवती से लव मैरिज की थी, जिससे माता-पिता नाखुश थे। पुलिस को आरोपी इंजीनियर ने बताया- मां और पिता मेरी शादी तुड़वाना चाहते थे। पुलिस 4 दिन से शवों को 15 गोताखोरों से तलाश करवा रही है। अभी तक सिर्फ पिता के शरीर का आधा हिस्सा मिला है। आरोपी इंजीनियर अम्बेश ने 8 दिसंबर को हत्या की थी। उसे 15 दिसंबर को गिरफ्तार किया गया था। उसने करीब 6 साल पहले पश्चिम बंगाल की एक मुस्लिम युवती से लव मैरिज की थी। उसके दो बेटे हैं। गांव के लोगों के मुताबिक, इंजीनियर नमाज भी पढ़ने लगा था। अब पढ़िए हत्या की पूरी कहानी… रिटायरमेंट के बाद पत्नी के साथ गांव में रहते थे श्याम बहादुर
जफराबाद क्षेत्र में अहमदपुर गांव के पुरानी गोदाम निवासी श्याम बहादुर मूल रूप से केराकत के खरगसेनपुर गांव के रहने वाले थे। उन्हें उनके ससुर रामनारायण ने अहमदपुर गांव में संपत्ति दी थी। श्याम बहादुर जमशेदपुर में रेलवे में लोको पायलट के पद पर तैनात थे। कुछ माह पूर्व ही वे रिटायर्ड हुए थे और अहमदपुर गांव में घर बनवाकर पत्नी बबीता के साथ रहने लगे थे। श्यामबहादुर के तीन बेटियां थीं। वंदना कुमारी, अर्चना और सपना। उनका एक बेटा अम्बेश कुमार है। अम्बेश दूसरे नंबर का था। तीनों बेटियों की शादी हो चुकी है। बीटेक की डिग्री लेने के बाद वह कोलकाता की एक कंपनी में बतौर क्वालिटी इंजीनियर कार्यरत है। उसे 25 हजार रुपए सैलरी मिलती थी। आरोपी ने बताया, कोलकाता में जॉब के दौरान उसकी मुलाकात सहजिया से हुई। दोनों की नजदीकियां बढ़ी और 2019 में लव मैरिज कर ली। दंपत्ति के दो बेटे हैं। एक की उम्र 5 साल तो दूसरे की उम्र 11 महीने है। हालांकि, इस लव मैरिज से उसके परिजन खुश नहीं थे। आए दिन इसको लेकर पिता श्याम बहादुर और मां बबीता से अम्बेश की कहासुनी होती थी। अम्बेश भी अपने मां-बाप से नाराज रहता था। उसने बताया- 8 दिसंबर की रात इसी बात को लेकर घर में झगड़ा हुआ और उसने दोनों की हत्या कर दी थी। बहन ने गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई
डबल मर्डर के बाद अम्बेश ने अपनी बहनों और रिश्तेदारों को फोन किया। कहा- मां-पिता कहीं चले गए हैं। इसके बाद वह खोजबीन का नाटक करता रहा। फिर खुद अचानक 12 दिसंबर को लापता हो गया। बड़ी बहन वंदना ने उसे फोन मिलाया। जब उसका भी पता नहीं चला तो उसने गुमशुदगी की रिपोर्ट थाने में दर्ज कराई। उसने बताया, चार दिन से उसके माता-पिता लापता हैं। अब भाई भी हो गया है। इसके बाद पुलिस सक्रिय हुई। पुलिस की तीन टीमें तलाश करने के लिए बनाई गईं। 15 दिसंबर की शाम अम्बेश पुलिस को मिल गया। पुलिस ने उससे पूछताछ की। पूछताछ के दौरान पुलिस को शक हुआ। कड़ाई करने पर उसने सच बता दिया। अब पढ़िए पूरा कबूलनामा… ASP (सिटी) आयुष श्रीवास्तव के अनुसार, अम्बेश ने पूछताछ में घटना का सिलसिलेवार ब्योरा दिया है। उसने बताया कि माता-पिता हर हाल में मेरी शादी तुड़वाना चाहते थे। वे चाहते थे कि दूसरी शादी कर ले। वह पहले तैयार भी हो गया, लेकिन गुजारा भत्ता उसे देना होता। माता-पिता गुजारा भत्ता देने को तैयार नहीं थे। इस पर उसने तलाक देने से इनकार कर दिया था। इसी बात पर कहासुनी हुई। मां ने कहा, तुम घर से निकल जाओ। इस पर मैंने कहा, यह घर मेरी नानी ने मुझे नेवासा में दिया है। आप लोग ही घर छोड़कर चले जाइये। इस पर मेरी मम्मी ने मुझे धक्का देकर घर से बाहर करने लगी तो मुझे गुस्सा आ गया। पास में टेबल पर लोहे का खल बट्टा रखा थी। उसका मूसल उठाया और मम्मी के सिर में मार दिया। इससे वह फर्श पर गिर कर छटपटाने लगीं, तब तक मेरे पापा भी वहां आ गए। वे कहने लगे मैं पुलिस को फोन करके बुला रहा हूं और मोबाइल लेकर पुलिस को फोन करने लगे तो मैंने उसी लोहे के मूसल से पापा के सिर पर मार दिया। पापा चिल्लाए और फर्श पर गिर गए तो एक बार और उनके सिर में जोर से मार दिया। तब भी वह चिल्लाने का प्रयास कर रहे थे तो मैं रस्सी से उनके गले को कस दिया। उसके बाद मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करूं। फिर इलेक्ट्रिक आरी से 6 टुकड़े किए
मैंने देखा कि मेरे मम्मी-पापा के सांसें बंद हो चुकी थीं। शव को छिपाने के बारे में सोचने लगा, फिर मैंने घर के बेसमेंट से लोहे की सरिया काटने वाली इलेक्ट्रिक आरी लाकर अपने मम्मी-पापा के शव को तीन–तीन टुकड़ों में काट दिया। फिर छह प्लास्टिक के बोरों में भरा। शरीर काटते समय निकले अवशेष को अलग एक बोरी में भरा। फिर स्विफ्ट डिजायर कार (UP62BV6304) के डिग्गी में लाद लिया। घर में फर्श पर लगे खून को पानी से साफ करके शव को सुबह करीब 4 से 5 बजे के बीच बेलाव पुल से गोमती नदी मे फेंक दिया। उसके बाद मैं घर पर आकर घर के फर्श व गाड़ी के डिग्गी को अच्छी तरह से सर्फ से साफ कर दिया था। घर में देखा कि मेरी मम्मी का कटा एक पैर घर में छूट गया था तो मैं उसी दिन कटा हुआ पैर को एक झोले मे लेकर अपनी स्विफ्ट डिजायर कार से जलालपुर में पुल से सई नदी में फेंक दिया था। बहनों से कहा– दोनों कहीं चले गए हैं
अम्बेश ने बताया, जब मेरी बहनों का फोन आया तो मैंने बता दिया कि मम्मी-पापा रात में कही चले गए हैं। मैं तलाश कर रहा हूं, जब मेरी बहनें मुझ पर दबाव बनाने लगीं कि तुम पुलिस में जाकर शिकायत करो तो डर गया। इधर-उधर टाल मटोल करने लगा। जब मेरी बहनों का दबाव ज्यादा बढ़ गया तो मैंने अपना मोबाइल बन्द करके पहले जौनपुर रेलवे स्टेशन, फिर वाराणसी में गंगा किनारे घाटों पर घूमने लगा। मेरा मन काफी घबरा रहा था। मुझे शान्ति नहीं मिल रही थी तो 15 दिसंबर को मैं वाराणसी से अपने घर अहमदपुर आया तो देखा कि मेरे घर में अलग से ताला लगा हुआ था, तो मैंने अपनी बहन को फोन करके घर की चाबी के बारे में पूछा। बहन, मम्मी-पापा के बारे मे पूछने लगी। मेरी बहनें आईं तो मैंने उन्हें सारी घटना बता दी। पिता का आधा हिस्सा मिला
पुलिस गोताखोरों की मदद से गाेमती नदी में तीन दिन से सर्चिंग कर रही है। बुधवार को दो प्लास्टिक की बोरी मिली हैं, जिसमें पिता का सीने से लेकर जांघ तक का हिस्सा है। सिर अब भी नहीं मिला है। वहीं मां के शरीर का कोई हिस्सा नहीं मिल रहा है। पुलिस ने सीन रिक्रिएट भी कराया
पुलिस ने आरोपी अम्बेश कुमार को घर ले जाकर घटना का सीन रीक्रिएट भी कराया। परिवार के एक सदस्य के मुताबिक, अम्बेश की पत्नी पहले 10 लाख रुपए की मांग कर रही थी। बाद में उसने यह राशि कम कर दी और सिर्फ 5 लाख रुपए में तैयार हो गई। अम्बेश यह रकम अपने पिता से मांग रहा था, लेकिन पिता ने रुपए देने से इनकार कर दिया। यही विवाद दंपती की हत्या का कारण बन गया। अम्बेश के चाचा संदीप कुमार ने बताया कि वह हमेशा पैसों को लेकर विवाद करता था। जब-जब उसे पैसों की जरूरत पड़ती थी, वह कोलकाता से गांव आता और माता-पिता से रुपए लेकर चला जाता था। पिता के पैसों से खरीदी कार, उसी से शव नदी में फेंके
तीन साल पहले अम्बेश कुमार ने पिता के पैसों से एक स्विफ्ट डिजायर कार खरीदी थी। उसी कार में उसने माता-पिता के शव रखकर गोमती नदी में फेंक दिया। पुलिस 15 गोताखोरों की टीम बनाकर सोमवार रात से शव तलाश करा रही है। तीसरे दिन भी शव नहीं मिले। ——————–
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