बैठक में डीएम ने पराली जलाने की समस्या पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए जिला कृषि पदाधिकारी को दोषी किसानों के विरुद्ध विभागीय प्रावधानों के तहत त्वरित दंडात्मक कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।
इस मामले में डीएम ने स्पष्ट कहा कि पराली जलाने के वाले किसानों पर कृषि समन्वयकों किसान सलाहकारों या संबंधित पदाधिकारियों पर बर्खास्तगी या निलंबन की कठोर कारवाई की जाएगी।
जिला कृषि पदाधिकारी ने बताया कि पराली जलाने के दुष्प्रभावों के बारे में किसानों के बीच व्यापक प्रचार प्रसार किया गया है फिर भी किसान पराली जला रहे हैं वैसी परिस्थिति में दोषी किसानों का पंजीकरण रद्द करने का निर्णय लिया गया है पंजी करण रद्द होने पर किसान तीन वर्ष तक कृषि विभाग की योजनाओं के लाभ से वंचित हो जाते हैं।
बैठक में बताया गया कि पराली जलाने से मिट्टी के पोषक तत्व नष्ट होते हैं,कार्बनिक पदार्थों की कमी होती है, लाभकारी जीवाणु नष्ट हो जाते हैं और वायु प्रदूषण बढ़ने से लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। वहीं पराली को मिट्टी में मिलाने से मिट्टी को नाइट्रोजन पोटास सल्फर और आर्गेनिक कार्बन जैसे तत्वों की प्राप्ति होती है।
डीएम ने कम्बाइन हार्वेस्टर संचालन पर भी दिशा -निर्देश जारी किए जिसमें अनुमति प्राप्त करने,शपथ पत्र लेने और संचालकों को जागरूक करने पर जोर दिया गया है। साथ ही धावा दल गठित कर पराली जलाने वालों पर सीआरपीसी की धारा 133 के तहत कार्रवाई करने का भी निर्देश दिया गया है।
