सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील निजाम पाशा ने अल्पसंख्यकों के खिलाफ हेट स्पीच और आर्थिक बहिष्कार के बढ़ते मामलों पर चिंता जताते हुए कहा कि कुछ सांसद और विधायक भी ऐसे आह्वान कर रहे हैं। इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि हेट स्पीच सभी धर्मों के खिलाफ हो रही है और वे सिर्फ एक धर्म के लिए पेश नहीं हो सकते। तब कोर्ट ने कहा कि वो इस याचिका की आड़ में कानून नहीं बनाएगा और हर छोटी घटना की निगरानी नहीं कर सकता है। तब निजाम पाशा ने उच्चतम न्यायालय के आदेश का जिक्र किया, जिसमें कहा गया है कि जहां भी हेट स्पीच की घटनाएं होती हैं, पुलिस खुद कार्रवाई कर सकती है। तब जस्टिस संदीप मेहता ने कहा कि अगर पुलिस ऐसा नहीं कर रही है तो यह अवमानना है। आपको उच्च न्यायालय जाना चाहिए।
सुनवाई के दौरान निजाम पाशा ने कहा कि असम के एक मंत्री ने बिहार चुनाव पर टिप्पणी करते हुए कहा कि बिहार में गोभी की खेती हुई है। निजाम पाशा ने इस टिप्पणी को सांप्रदायिक हिंसा से जोड़ा और कहा कि इसका मतलब है कि अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को फूलगोभी के खेतों में दफनाया गया था। इस पर जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा कि वे इस हस्तक्षेप याचिका को मुख्य याचिका के साथ टैग करेंगे। कोर्ट ने इस याचिका को भी मुख्य याचिका के साथ टैग कर 9 दिसंबर को अगली सुनवाई करने का आदेश दिया।
