भगवान नारायण की बदरीशपुरी में 481 करोड़ के मास्टर प्लान का दिखने लगा स्वरूप

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दरअसल, बदरीनाथ में मास्टरप्लान के तहत संतुलित व समग्र विकास योजना पर काम हो रहा है। इससे यहां धार्मिक, पर्यावरणीय और सामाजिक दृष्टिकोण से स्वास्थ्यपूर्ण तीर्थस्थल के रूप में विकसित करने का लक्ष्य है। इस योजना के लिए 481 करोड़ का बजट रखा गया है। इससे इस स्थल को एक स्मार्ट आध्यात्मिक सिटी के रूप में विकसित किया जा रहा है।

इस प्रोजेक्ट के तहत मंदिर परिसर के पुनर्गठन, जाम कम करने के उपाय, पर्यावरण संरक्षण, सड़क, पैदल मार्ग और सार्वजनिक उद्यानों का विकास शामिल हैं।

परियोजना के तहत अलकनंदा नदी के किनारे एक नदीफ्रंट और प्लाज़ा का निर्माण, बिजली, पानी और स्वच्छता जैसी मूलभूत सुविधाओं का उन्नयन किया जा रहा है, मास्टरप्लान में भूमि उपयोग और भवन निर्माण नियमों के कड़ाई से पालन, पर्यावरणीय संवेदनशीलता और भूकंपीय सुरक्षा के उपाय भी शामिल किए गए हैं।

इस योजना के तहत स्थानीय लोगों के लिए रोजगार सृजन, सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण और तीर्थयात्रियों के लिए बेहतर अनुभव प्रदायन पर विशेष ध्यान दिया गया है।

अगले 50 सालों में तीर्थ यात्रियों की संख्या को ध्यान में रखते हुए परियोजना का भौतिक और सामाजिक बुनियादी ढांचा तीन चरणों में पूरा किया जाएगा, जो 85 हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैला है।

मास्टर प्लान के तहत बदरी नगरी के बाजार को व्यवस्थित किया जा रहा है ताकि श्रद्धालुओं को स्थानीय उत्पादों की खरीदारी के लिए आकर्षित हो सकें।

इसका एक फायदा और होने जा रहा है कि धाम परिसर तक जाने वाला मार्ग भी चौड़ा हो जाएगा।

श्रद्धालुओं के रहने के लिए सुविधाएं बढ़ाई जा रही हैं।

केंद्र सरकार आने वाले समय में रेल प्रोजेक्ट के कर्णप्रयाग तक पहुंच जाने के बाद द्वितीय फेस में रेल को और आगे पहुंचाने की संभावनाओं को भी तलाश रही है। इस संबंंध में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात के दौरान बदरी और केदार धाम के विकास के बारे में जरूर चर्चा हुई।

पीएमओ लगातार इस प्रोजेक्ट की समीक्षा कर रहा है। साथ ही हमारी सरकार भी इस पर लगातार विशेष ध्यान दे रही है।