अपने ही देश में पराधिनता की पीड़ा कष्टदायक : अनुराग रस्तोगी

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चंडीगढ़, 7 नवंबर । राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ के 150 साल पूरे होने का स्मरणोत्सव आज पूरे हरियाणा में पूरी गरिमा और शालीनता से मनाया गया। चंडीगढ़ स्थित हरियाणा सिविल सचिवालय में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। रस्तोगी ने कहा कि अपने ही देश में पराधीनता की पीड़ा कितनी कष्टदायी होती है, इसकी कल्पना ही बड़ी मुश्किल है। सन 1857 में स्वतंत्रता के पहले संग्राम का बिगुल बजा और प्रबुद्ध नागरिकों ने अंग्रेजों के अत्याचारों के खिलाफ बोलना शुरू किया।

उन्होंने कहा कि गीत-संगीत, की हमारे देश में एक लंबी परम्परा रही है। ऐसा ही एक गीत है-वंदे मातरम। इस अमर गीत ने अंग्रेजी शासन के अत्याचारों से ग्रस्त और त्रस्त जनमानस को उद्वेलित कर जन-जन में देशभक्ति की ज्योति प्रज्वलित की, राष्ट्रीय चेतना को स्वर प्रदान किया और भारत के स्वाधीनता संग्राम को दिशा दी। मुख्य सचिव ने कहा कि जो देश-प्रदेश अपने इतिहास को याद नहीं रखते, उनका अस्तित्व भी ज्यादा समय तक नहीं रहता।

इसी दौरान हरियाणा विधानसभा में शुक्रवार सुबह राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के 150वें स्मरणोत्सव के अवसर पर विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर हरियाणा विधान सभा के सचिव राजीव प्रसाद और विधान सभा अध्यक्ष के सलाहकार राम नारायण यादव ने कार्यक्रम को संबोधित किया।

विधान सभा सचिव राजीव प्रसाद ने अपने संबोधन में कहा कि वंदे मातरम् गीत की रचना को आज 150 वर्ष पूरे हो गए हैं। यह गीत स्वतंत्रता सेनानियों की आवाज रहा और आज भी मातृभूमि के प्रति प्रेम और समर्पण का प्रतीक बना हुआ है। वंदे मातरम् का पहली बार 7 नवंबर 1875 को बंगदर्शन पत्रिका में प्रकाशन हुआ था, जबकि 1882 में बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने इसे अपने प्रसिद्ध उपन्यास आनंदमठ में प्रकाशित किया। बाद में रवींद्रनाथ टैगोर ने इसे संगीतबद्ध कर इसे जन-जन तक पहुंचाया। विस सचिव राजीव प्रसाद ने कहा कि उन्होंने कलम के माध्यम से भारतीयों के हृदय में स्वदेश प्रेम की भावना जगाई। उनका साहित्य और जीवन आज भी भारतीय राष्ट्रवाद की प्रेरणा बना।