भाई सरबजीत सिंह सुचेतगढ़ ने अमृत हर का नाम है वर्षे कृपा धार का भावपूर्ण गायन के साथ व्याख्या करते हुए कहा कि ईश्वर का नाम ही अमृत है, जो कृपा रूप में हम सब पर बरसता है और इसे पाने के लिए गुरु की शरण ही सच्चा मार्ग है। पूरे कीर्तन दरबार के दौरान सतनाम-वाहेगुरु के जाप से पूरा परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत रहा। संगत को भावविभोर करने वाले अन्य जत्थों में सुखमणि साहिब कीर्तन जत्था, सिख स्त्री सत्संग सभा, हजूरी रागी गुरुद्वारा साहिब साकची, भाई नारायण सिंह जी अमृतसर, ज्ञानी अमृतपाल सिंह मन्नण, भाई हरप्रीत सिंह जेठुवाल ढाढी जत्था भी शामिल रहे।
इस दौरान बड़ी संख्या में संगत ने भाग लेकर गुरु चरणों में मत्था टेका और अटूट लंगर का प्रसाद ग्रहण किया।
तीन दिवसीय कीर्तन दरबार की सफलता में प्रधान सरदार निशान सिंह के नेतृत्व में परमजीत सिंह काले, अजायब सिंह बरियार, सतनाम सिंह सिद्धू, सतबीर सिंह गोल्डू, सन्नी सिंह बरियार, जसबीर सिंह गांधी सहित अन्य का योगदान सराहनीय रहा।
