उन्होंने कहा कि उनकी डिग्रियां केवल शैक्षणिक उपलब्धि नहीं बल्कि उन मूल्यों, अनुशासन और मानसिक दृढ़ता का प्रतीक हैं, जो उन्होंने विश्वविद्यालय में अपने समय के दौरान विकसित किए हैं। उन्होंने कहा कि तकनीकी दक्षता और अकादमिक उत्कृष्टता के साथ-साथ छात्रों में अच्छे संस्कार, चरित्र और सामाजिक जिम्मेदारी का होना आवश्यक है। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की सराहना करते हुए कहा कि यह नीति बहुविषयक शिक्षा, लचीलापन और अनुसंधान आधारित विकास के लिए एक मार्गदर्शिका प्रदान करती है। उपराष्ट्रपति ने विकसित भारत 2047 के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए कहा कि यह समावेशी और समान विकास के लिए है। सरकारी प्रयासों से अनुसूचित जाति और जनजाति के छात्रों, ग्रामीण क्षेत्रों और महिलाओं की शिक्षा में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उन्होंने छात्रों से अपने प्रयासों पर ध्यान केंद्रित करने, हार और सफलता को संतुलित दृष्टिकोण से लेने और कठिन परिश्रम के माध्यम से सफलता पाने की सलाह दी।
इस अवसर पर हरियाणा के पंचायत और विकास मंत्री कृष्ण लाल पंवार, एसआरएम यूनिवर्सिटी चेन्नई के संस्थापक और कुलाधिपति डॉ. टी. आर. पारिवेन्धर, एसआरएम यूनिवर्सिटी सोनीपत के कुलाधिपति डॉ. रवी पचमुथु और कुलपति प्रो. परमजीत सिंह जसवाल मौजूद रहे।
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