संक्रमित रक्त चढ़ाने के मामले की हो न्यायिक जांच : मधु कोड़ा

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मधु कोड़ा ने इस दौरान अस्पताल प्रशासन से पूरे मामले की विस्तृत जानकारी ली और इसे महज चिकित्सीय गलती नहीं, बल्कि राज्य सरकार की घोर लापरवाही और प्रणालीगत विफलता करार दिया। उन्होंने झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी के तत्काल इस्तीफे की मांग की। उन्होंने कहा कि राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है।

राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री ने डीएस डॉ. शिवचरण हांसदा और प्रभारी सिविल सर्जन डॉ. भारती गौरेती मिंज से मुलाकात कर इस बात की जानकारी मांगी कि दूषित रक्त बच्चों तक कैसे पहुंचा। उन्होंने कहा कि जब चाईबासा ब्लड बैंक का लाइसेंस वर्षों से नवीनीकृत नहीं हुआ है, तब यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि अस्पताल आखिर किस जांच प्रक्रिया के तहत मरीजों को रक्त उपलब्ध करा रहा था।

कोड़ा ने कहा कि रक्त की त्रिस्तरीय जांच अनिवार्य होती है, लेकिन अस्पताल में इसकी पूरी तरह से उपेक्षा की गई है। राज्य सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि स्वास्थ्य मंत्री केवल बयानबाज़ी में व्यस्त हैं, जबकि अस्पतालों में इलाज की बुनियादी सुविधाएं तक नहीं हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की ओर से पीड़ित परिवारों को मात्र दो लाख रुपये मुआवजा देने की घोषणा को अमानवीय और अन्यायपूर्ण बताया। उनके अनुसार, मुआवजा इलाज का विकल्प नहीं हो सकता, सरकार को पीड़ित बच्चों के जीवन की जिम्मेदारी लेनी चाहिए।

मधु कोड़ा ने कहा कि इस घटना ने राज्य की स्वास्थ्य प्रणाली की सच्चाई उजागर कर दी है। उन्होंने मामले की न्यायिक जांच की मांग करते हुए कहा कि दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए और राज्य के सभी ब्लड बैंकों की तुरंत जांच की जानी चाहिए, जिससे कि भविष्य में इस तरह की घटनाएं दोबारा न हों।

अस्पताल प्रशासन ने पूर्व मुख्यमंत्री को बताया कि उन्होंने कई बार सरकार को आवश्यक उपकरणों और सुविधाओं की आपूर्ति के लिए पत्राचार किया है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। कोड़ा ने इसे सरकार की संवेदनहीनता बताया और कहा कि जब तक स्वास्थ्य व्यवस्था को प्राथमिकता नहीं दी जाएगी, ऐसे हादसे झारखंड के माथे पर कलंक बनते रहेंगे।

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