भोपाल, 14 अक्टूबर । मध्य प्रदेश के औषधि नियंत्रक दिनेश श्रीवास्तव ने मंगलवार को इंडियन ड्रग मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन, एम.पी.एस.डी.एम.ए. एसोसिएशन एवं एफ.एम.पी.सी.सी.आई. एसोसिएशन के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर दवा गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए केंद्र एवं राज्य की गाइडलाइन के सख्त अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने औषधि निर्माताओं को निर्देशित किया कि निर्माण प्रक्रिया के दौरान सभी कच्चे माल एवं तैयार औषधियों का बैचवार परीक्षण अनिवार्य रूप से किया जाए तथा केवल उच्च गुणवत्ता वाली औषधियाँ ही बाजार में जारी की जाएँ।
औषधि नियंत्रक श्रीवास्तव ने सभी औषधि निर्माण इकाइयों को भारत सरकार के ऑनलाइन राष्ट्रीय औषधि अनुज्ञापन प्रणाली (ओ.एन.डी.एल.एस.) पर अनिवार्य पंजीयन एवं प्रविष्टि पूर्ण करने के निर्देश दिए गए। साथ ही यह भी निर्देशित किया गया कि क्लोर्फिनाईरामिन मैलिएट एवं फिनाईलएफ्रीन हाइड्रोक्लोराइड संयोजन वाली सभी औषधियों के लेबल एवं पैक पर चेतावनी —”चार वर्ष से कम आयु के बच्चों को यह संयोजित औषधि नहीं दी जानी चाहिए” अनिवार्य रूप से अंकित की जाए। इसके अतिरिक्त, भारत सरकार द्वारा औषधियों पर वस्तु एवं सेवा कर (जी.एस.टी.) में की गई दर कटौती के प्रति नागरिकों को जागरूक करने के भी निर्देश दिए।
