सांसद कुमारी सैलजा ने मंगलवार मीडिया को जारी एक प्रेस बयान में कहा है कि उनके द्वारा इस गंभीर मुद्दे को लोकसभा में भी उठाया गया। सिरसा जिले के साथ-साथ घग्गर नदी के किनारे बसे अन्य जिलों फतेहाबाद, कैथल और अंबाला के गांवों की भी वैज्ञानिक जांच करवाई जानी चाहिए। यह केवल सिरसा का नहीं बल्कि पूरे हरियाणा का स्वास्थ्य संकट बन चुका है। सांसद ने कहा कि सरकार द्वारा अब तक जो आंकड़े पेश किए जाते हैं, वे जमीनी सच्चाई से बहुत दूर हैं। राज्य के स्वास्थ्य विभाग को चाहिए कि वह स्वतंत्र एजेंसियों और चिकित्सा विशेषज्ञ संस्थानों जैसे पीजीआई, एम्स और एनआईएचएफडब्ल्यू के साथ मिलकर एक विस्तृत महासर्वे करवाए ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
सांसद ने कहा कि कैंसर के मरीजों को इलाज के लिए राज्य से बाहर न जाना पड़े, इसके लिए हरियाणा में कैंसर उपचार की स्थानीय क्षमता बढ़ाना अब अत्यंत आवश्यक है। सिरसा, फतेहाबाद और हिसार जैसे जिलों में कैंसर जांच केंद्रों और उपचार सुविधाओं को तत्काल सुदृढ़ किया जाए। राज्य सरकार से यह मांग की कि प्रभावित गांवों में जल, मिट्टी और फसल के सैंपल लेकर वैज्ञानिक विश्लेषण कराया जाए ताकि कैंसर के बढ़ते मामलों के वास्तविक कारणों की पहचान की जा सके चाहे वे जल प्रदूषण, कीटनाशक रसायनों या औद्योगिक अपशिष्ट से जुड़े हों।
प्रदेश में कैंसर रोगियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। खासकर घग्गर नदी के किनारे पडऩे वाले जिलों जैसे सिरसा, फतेहाबाद, कैथल और अंबाला में। प्रदेश के सिविल अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की अनुपलब्धता के साथ समुचित उपचार के अभाव में रोगी अपनी जान गंवा रहे हैं।
