बस्तर दशहरा पर्व में चली आ रही है परम्परा के अनुसार सप्तमी के दिन बेल पूजा किया जाता है। इसके एक दिन पूर्व रात्री में सरगीपाल स्थित बेलदेवी को राजपरिवार, दंतेश्वर मंदिर के प्रधान पुजारी एवं राजगुरू के द्वारा विधिवत बेल न्यौता रस्म में जुड़वा बेल की पहचान कर नारियल-सुपारी बांधकर बेल न्यौता दिया गया था । आज साेमवार की दोपहर को दंतेश्वरी मंदिर के प्रधान पुजारी कृष्ण कुमार पाढी द्वारा विधिवत बेल पूजा विधान संपन्न कराया गया। राजपरिवार के सदस्य कमलचंद भंजदेव ने बेल पूजा के दौरान वर्षों से चली आ रही परम्परा के अनुसार बेल देवी को सोलह श्रृंगार भेंट किया गया। इस दौरान यहां भी दो बकरो की बलि दी गई। पूजा के बाद बेल न्यौता रस्म के दौरान चिन्हित जुड़वा बेल को तोड़ा गया । इस अवसर पर ग्रामीण बेल देवी को कन्या स्वरूप मानकर इसकी विदाई के रूप में हल्दी खेला गया। विदाई से पहले जुड़वा बेल राजपरिवार के सदस्य को दंतेश्वरी मंदिर में स्थपित करने के लिए भेंट किया गया।
दंतेश्वरी मंदिर के प्रधान पुजारी कृष्ण कुमार पाढी ने बताया कि बस्तर दशहरा की परंपरानुसार ग्राम सरगीपाल में स्थित बेल वृक्ष व इसमें लगे जुड़वा बेल को रियासत कालीन परंपरानुसार विधिवत पूजा संपन्न करने के बाद जुडवा बेल फल को राजपरिवार के सदस्य कमलचंद्र भंजदेव के द्वारा ससम्मान दंतेश्वरी मंदिर लाकर स्थपित किया गया।
