राजयोग के द्वारा स्वयं के अंदर अष्ट शक्तियों को धारण कर अष्टभुजा धारिणी बन आसुरी संस्कारों का मर्दन किया। तभी उनका नाम दुर्गा पड़ा अर्थात् दुर्गुणों का नाश करने वाली माँ। उन्होंने कहा- हमें फक्र है कि हम ऐसी माँ की संतान हैं। अभी हम भी परमात्मा शिव से सर्व शक्तियाँ लेकर स्वयं को जगदम्बा माँ समान बना सकते हैं और सृष्टि को पापाचार, भ्रष्टाचार, अनाचार से मुक्त कर भारत को फिर से देवालय सतयुग बनाने में परमात्मा शिव और माँ जगदम्बा के सहयोगी बनने का भाग्य प्राप्त कर सकते हैं।
राजयोगिनी रानी दीदी का चैतन्य देवी के रूप में सम्मान एवं अभिनंदन कार्यक्रम आयोजित
