घटना 19 मई 2024 की है,जब त्रिशूलिया घाट पर क्षत विक्षत अवस्था में अज्ञात एक युवक का शव मिला था।युवक का गला कटा हुआ था और सिर के दाहिने तरफ कनपटी और छाती चाकू के कई प्रहार से गोदा हुआ था।जांघ आदि पर भी प्रहार के साथ जानवरों द्वारा नोचा हुआ शव था और शव को शिनाख्त नहीं हो पाई थी।
नगर थानाध्यक्ष मनीष कुमार रजक ने ही अपने बयान पर प्राथमिकी कांड संख्या 285/24 भादवि की धारा 302 और 201 के तहत दर्ज कराया था।पुलिस ने वैज्ञानिक एवं तकनीकी अनुसंधान का सहारा लेते हुए शव के शिनाख्त के साथ ही घटना में शामिल दो युवकों को गिरफ्तार किया था।गिरफ्तार आरोपितों के निशानदेही पर ही बगल में मिट्टी के अंदर छिपाकर रखे मृतक का पैंट और शाहनवाज के पास से मृतक का मोबाइल और घटना में प्रयुक्त चाकू बरामद किया गया।मामले को लेकर अभियोजन पक्ष की ओर से कोर्ट के समक्ष 13 साक्ष्य उपलब्ध कराए गए।जिसमें दो एफएसएल का रिपोर्ट भी शामिल है।
बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता देवनारायण सेन ने कोर्ट के समक्ष अपनी दलीलें देते हुए कम उम्र का हवाला देते हुए कम से कम सजा की गुहार लगाई।जबकि अभियोजन पक्ष की ओर से अपर लोक अभियोजक प्रभा कुमारी ने कोर्ट से नृशंसतापूर्वक किए गए हत्या मामले में विधि सम्मत पूरी सजा दिए जाने की मांग रखी।कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद अपना फैसला सुनाया और भादवि की धारा 302 में सश्रम आजीवन कारावास और 25-25 हजार रूपये और भादवि की धारा 201 में पांच साल की सजा और 15- 15 हजार रूपये के अर्थ दंड के तहत जुर्माने की सजा सुनाई।
