उन्होंने कहा कि सरकार पहले रोटी, दूध, दही, मक्खन, कफन, किताब, कलम आदि कई चीजों से टैक्स लगाकर लूट मचा रही थी। अब चुनाव आते ही जीएसटी बचत उत्सव मना रही है। जीएसटी लगने से गरीब जनता तबाह हो गयी है। सरकार का कोई ठोस निर्णय नहीं होता है। जिसके कारण दिल्ली में अपने हक की लड़ाई लड़ने में सैकड़ों किसान शहीद होने के बाद सरकार गलत किसान विधेयक को वापस लिया।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के घोषणाएं, जिसमें सभी के खाते में 15 लाख रुपए देंगे। प्रत्येक साल 2 करोड़ नौकरी देने के वादे हवा हवाई रह गए। देश में महंगाई एवं भ्रष्टाचार चरम पर पहुंच गया है। देश हित एवं जनहित में सरकार का फैसला सही नहीं होता है।
उन्होंने कहा कि इसके खिलाफ जनता के बीच जाकर बताने का काम करेंगे।
