उनके नेतृत्व में केवल 20 दिन में ही जीएसटी काउंसिल ने ऐतिहासिक सुधार करते हुए सभी जरूरी वस्तुओं पर टैक्स या तो खत्म कर दिया है या फिर काफी कम कर दिया है।
नए जीएसटी बदलाव में 28 प्रतिशत और 12 प्रतिशत के स्लैब को खत्म कर दिया गया है, यानी अब सिर्फ दो टैक्स स्लैब होंगे- 5 प्रतिशत और 18 प्रतिशत।
इन सुधारों को जमीन पर उतारने के लिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, जीएसटी काउंसिल और भारत के सभी राज्यों के वित्त मंत्रियों का भी आभार जताते हुए जेपी नड्डा कहा कि कई आवश्यक वस्तुओं पर जीएसटी शून्य कर दिया गया है। अन्य कई उत्पादों पर इसे काफ़ी कम कर दिया गया है। इन सुधारों से नागरिकों का जीवन स्तर बढ़ेगा और व्यापारियों एवं छोटे व्यवसायों के लिए कारोबार करना आसान होगा। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल राजस्व संग्रह करना नहीं है बल्कि हर नागरिक के जीवन स्तर को बेहतर बनाना भी है। यह निर्णय अर्थव्यवस्था को मज़बूत करेगा और नई उम्मीदें जगाएगा।
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य और जीवन बीमा प्रीमियम पर टैक्स हटाने का फैसला बहुत अहम है और इससे लोगों की स्वास्थ्य एवं वित्तीय सुरक्षा मज़बूत होगी। इन सुधारों से आम आदमी के साथ ही कृषि, निर्माण और चिकित्सा सहित हर क्षेत्र को बल मिलेगा।
उन्होंने जीएसटी सुधारों पर सवाल उठाने को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्षी दल की दोहरी मानसिकता को उजागर करता है, क्योंकि राहुल गांधी इन फैसलों का विरोध करते हैं, जबकि उनकी पार्टी की सरकारों के वित्त मंत्री इन्हीं फैसलों का समर्थन करते हैं। यूपीए सरकार जीएसटी लागू ही नहीं कर पाई क्योंकि राज्यों को उसपर भरोसा नहीं था। इसके विपरीत उस समय कांग्रेस ने वैट (मूल्य वर्धित कर) के ज़रिए गरीबों और व्यापारियों को लूटा और टैक्स चोरी की भरपूर गुंजाइश छोड़ी।
उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने 2017 में जीएसटी लागू कर “वन नेशन, वन टैक्स” की अवधारणा को साकार किया।
