बबलू मुंडा ने बताया कि करम महोत्सव झारखंड की संस्कृति और परंपरा का महत्वपूर्ण प्रतीक है, जिसमें करम देवता से भाई-बहनों की लंबी उम्र और खुशहाली की कामना की जाती है। उन्होंने क्षेत्रवासियों से अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर महोत्सव को सफल बनाने की अपील की।
महोत्सव को लेकर समिति के कार्यकर्ताओं और स्थानीय ग्रामीणों में खासा उत्साह देखा जा रहा है। अखड़े की सजावट और तैयारियों ने पूरे वातावरण को उल्लासपूर्ण बना दिया है।
समिति की ओर से जारी कार्यक्रम के अनुसार दो सितंबर मंगलवार को करमाइत बहनों का उपवास। इसके बाद तीन सितंबर (बुधवार) को भादो एकादशी की संध्या सात बजे करम राजा का आगमन होगा। तथा रात्रि 9.30 बजे पारंपरिक रीति-रिवाज और मंत्रोच्चारण के बीच करम राजा की पूजा-अर्चना की जाएगी। वहीं, चार सितंबर (गुरुवार) को दोपहर एक बजे से शाम पांच बजे तक करम नृत्य कार्यक्रम का आयोजन होगा, जिसमें ग्रामीण अंचल से आए कलाकार पारंपरिक करम गीत और नृत्य की प्रस्तुति देंगे। इसके बाद संध्या छह बजे से सात बजे तक करम राजा का विसर्जन किया जाएगा।
