कार्यशाला में समिति के राज्याध्यक्ष प्रमोद गौरी ने बताया कि इस कार्यशाला का उद्देश्य दिसंबर 2024 में कोलकाता में हुई राष्ट्रीय कांग्रेस में लिए गए निर्णयों को प्रभावी ढंग से लागू करने के उपायों पर चर्चा करना था। एआईपीएसएन की राष्ट्रीय महासचिव आशा मिश्रा ने जन-विज्ञान आंदोलन को मज़बूत बनाने के लिए सामूहिक नेतृत्व के विकास एवं कार्यक्रमों में समन्वय पर बल दिया। डॉ. प्रमोद गौरी ने कहा कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण ही समाज को समस्याओं से उबार सकता है। विज्ञान ने मानव समाज को दिशा दी है और महान वैज्ञानिकों ने इसके लिए अपना जीवन समर्पित किया है।
जोगिंदर वालिया ने जलवायु परिवर्तन के कारण पहाड़ों में अवैज्ञानिक सड़क एवं बांध निर्माण से हो रहे भूमि कटाव व बाढ़ जैसी समस्याओं पर चिंता व्यक्त की। दिल्ली साइंस फोरम से जुड़े वैज्ञानिक डॉ. डी. रघुनन्दन ने जलवायु परिवर्तन के वैश्विक प्रभावों— मौसम में असामान्य बदलाव, बाढ़, भीषण गर्मी और इनके सामाजिक-आर्थिक दुष्परिणामों—पर सरल भाषा में विचार रखे। भविष्य की योजनाओ मे सभी राज्यों के प्रतिनिधियों ने वैज्ञानिक मानसिकता, शिक्षा, स्वास्थ्य, और सामाजिक न्याय के लिए अपने-अपने अनुभव एवं योजनाएं साझा कीं।
कार्यशाला में यह तय किया गया कि आने वाले समय में पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन, जेंडर समानता और युवा बचाओ अभियान जैसे विषयों पर विशेष कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी। हिमाचल से लोकगायिका कृष्णा ठाकुर, सत्यवान पुंडीर, अंकित दुबे, रित्विक, विनय, डिम्पल, प्रदीप शर्मा, मोमिन आदि ने प्रगतिशील व जनपक्षीय गीत प्रस्तुत कर सभी सत्रों को जीवंत बनाया।
