उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत में ‘सतराली की होली’ आपसी भाईचारे और अटूट आस्था की एक अद्भुत मिसाल है. यह परंपरा अल्मोड़ा जिले के सात गांवों और बागेश्वर के बागनाथ मंदिर के बीच सदियों पुराने रिश्तों को जीवंत करती है. हर साल ताकुला क्षेत्र के सात गांवों के होल्यार पारंपरिक वाद्ययंत्रों के साथ बागनाथ धाम पहुंचते हैं, जहां शिव की स्तुति के साथ होली का आगाज होता है. पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही यह परंपरा न केवल कुमाऊंनी बैठकी होली के वैभव को दर्शाती है, बल्कि यह भी बताती है कि कैसे साझा विरासत दो जिलों को एक सूत्र में पिरोती है.
7 गांव मिलकर खेलते हैं होली! जब अल्मोड़ा से बागनाथ पहुंचते हैं होल्यार, तो जी उठती है सदियों पुरानी परंपरा
