लखनऊ में 5 CHC बनेंगे ट्रॉमा सेंटर:24 घंटे मिलेगा मरीजों को इलाज, 82 प्राइवेट हॉस्पिटल में घायलों को मिलेगा फ्री इलाज

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लखनऊ में हाईवे से सटी CHC अपडेट करके उन्हें ट्रॉमा सेंटर में तब्दील किया जाएगा। वहां पर सड़क हादसे में जख्मी मरीजों को 24 घंटे इलाज मिलेगा। अभी CHC पर हादसे में जाने वाले मरीजों को जिला अस्पताल या हॉयर सेंटर रेफर किया जाता है। स्वास्थ्य विभाग के जरिये कार्ययोजना तैयार करके CHC को ट्रॉमा में बदले जाने की तैयारी है। इसे लेकर संसाधन समेत विशेषज्ञ जुटाने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। अफसरों का कहना है शासन से बजट मिलते ही CHC को ट्रॉमा में बदला जाएगा। 2 महीने में बदलाव करने की तैयारी सीएमओ के अधीन 20 सीएचसी का संचालन हो रहा है। इसमें हाईवे से सटी पांच CHC को ट्रॉमा में बदला जाएगा। इसमें मोहनलालगंज, सरोजनीनगर, गोसाईगंज, काकोरी, चिनहट CHC हैं। अभी यहां पर हादसे में जख्मी आने वाले मरीजों के लिए इलाज के पुख्ता इंतजाम नहीं है। ऐसे में डॉक्टर प्राथमिक उपचार देकर उन्हें हायर सेंटर रेफर कर देते हैं। सड़क सुरक्षा के तहत इन पांचों CHC को ट्रॉमा के रूप में अपडेट किया जाएगा। CHC पर पांच बेड का आईसीयूू व कुशल विशेषज्ञ तैनात किए जाएंगे। जांच के पुख्ता के इंतजाम किए जाएंगे। अभी तक शाम ढलते ही CHC पर जांच बंद हो जाती है। एक्सरे तक आसानी से रात में नहीं होते हैं। सीएमओ डॉ. एनबी सिंह का कहना है कि पांच CHC को ट्रॉमा के तौर पर बदला जाएगा। जहां पर 24 घंटे इलाज के इंतजाम होंगे। इसके लिए संसाधान व बजट की मांग हुई है। उम्मीद है कि आगामी डेढ़ से दो माह में इन CHC को ट्रॉमा में बदला जाएगा। निजी अस्पतालों से किया जा रहा अनुबंध सड़क दुर्घटनाओं में घायल व्यक्तियों को त्वरित और मुफ्त उपचार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जिले में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना कैशलैस ट्रीटमेंट ऑफ रोड एक्सीडेंट विक्टिम्स स्कीम-2025 लागू की गई है। जिसके तहत सरकारी के साथ ही निजी अस्पताल भी घायलों को तत्काल इलाज मुहैया कराएंगे। स्वास्थ्य विभाग की ओर से जिले के करीब 82 अस्पतालों को सूचीबद्ध किया गया है। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. एनबी सिंह ने बताया कि अब दुर्घटना में घायल व्यक्ति का इलाज न केवल सरकारी बल्कि सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में भी निशुल्क किया जाएगा। कानपुर रोड, अयोध्या, सीतापुर रोड, हरदोई समेत दूसरे हाइवे से सटे बड़े अस्पतालों को सूचीबद्व किया जा रहा है। इसमें उन अस्पतालों को शामिल किया जा रहा है जहां पर आर्थोपैडिक, सर्जन, फिजि​शियन और न्यूरो सर्जन तैनात हैं। सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति के उपचार पर आने वाला अधिकतम डेढ़ लाख रुपये तक का खर्च जिला सड़क सुरक्षा समिति जरिये वहन किया जाएगा।