यमुनानगर 70 करोड़ के धान घोटाले में 4 अधिकारी बर्खास्त:DFSC के 3 इंस्पेक्टर और 1 AFSO शामिल; स्टॉक मिलान में मिली अनियमितताएं

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यमुनानगर जिले में सामने आए करीब 70 करोड़ रुपए के बहुचर्चित धान घोटाले में हरियाणा सरकार ने सख्त कार्रवाई करते हुए खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के 3 इंस्पेक्टर और एक एएफएसओ (सहायक खाद्य एवं आपूर्ति अधिकारी) को सेवा से बर्खास्त कर दिया है। यह कार्रवाई विभाग के निदेशक अंशज कुमार द्वारा जारी आदेशों के तहत की गई, जिसमें स्पष्ट रूप से कहा गया कि संबंधित अधिकारियों की गंभीर लापरवाही, कर्तव्य में चूक और संभावित मिलीभगत के कारण सरकार को करोड़ों रुपS का नुकसान हुआ। अधिकारियों को सौंपी गई थी राइस मिलों की जिम्मेदारी जांच में सामने आए तथ्यों के अनुसार, यह पूरा घोटाला धान खरीद सीजन 2025-26 के दौरान हुआ, जब संबंधित अधिकारियों को विभिन्न अनाज मंडियों और राइस मिलों की निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इन अधिकारियों में इंस्पेक्टर सविता छछरौली क्षेत्र, विनोद कुमार प्रतापनगर और मनोज यादव रणजीतपुर मंडी में तैनात थे। जबकि एएफएसओ देवेंद्र कुमार प्रतापनगर मंडी में सुपरवाइजरी भूमिका निभा रहे थे। इन सभी के कार्यकाल में संबंधित राइस मिलों में धान की भारी कमी सामने आई। निरीक्षण में सामने आई भारी गड़बड़ी पूरा मामला 13 नवंबर 2025 को उस समय उजागर हुआ, जब विभाग के निदेशक ने प्रतापनगर क्षेत्र की राइस मिलों का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान फिजिकल वेरिफिकेशन में भारी मात्रा में धान की कमी सामने आई। उदाहरण के तौर पर, विनोद कुमार से जुड़े मामले में 6108 मीट्रिक टन धान का आवंटन किया गया था, लेकिन मौके पर केवल लगभग 17464.59 मीट्रिक टन की कमी पाई गई। जिससे सरकार को करीब 22.70 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। करोड़ों की वित्तीय हानी का अनुमान इसी तरह, मनोज कुमार यादव के मामले में भी राइस मिलों में 5443 मीट्रिक टन धान की कमी और कुल मिलाकर 4233.25 मीट्रिक टन की गड़बड़ी सामने आई, जिससे लगभग 11 करोड़ रुपए से अधिक की वित्तीय हानि का अनुमान लगाया गया। वहीं इंस्पेक्टर सविता के कार्यकाल में भी 3995.85 मीट्रिक टन धान के आवंटन के मुकाबले भारी कमी पाई गई, जिससे लगभग 8.17 करोड़ रुपए का नुकसान सामने आया। एएफएसओ देवेंद्र कुमार के मामले में भी प्रतापनगर की राइस मिलों में धान की कमी, रिकॉर्ड में गड़बड़ी और निगरानी में गंभीर चूक सामने आई, जिसमें लगभग 22.70 करोड़ रुपए के नुकसान का जिक्र किया गया है। फर्जी गेट पास और रिकॉर्ड में हेराफेरी जांच रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि मंडियों में फर्जी गेट पास जारी कर कागजों में धान की खरीद दिखा दी गई, जबकि वास्तविक रूप से धान का स्टॉक मौजूद नहीं था। संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी थी कि वे राइस मिलों में धान की आवक, भंडारण और स्टॉक का मिलान सुनिश्चित करें, लेकिन उन्होंने न केवल यह जिम्मेदारी ठीक से नहीं निभाई, बल्कि कई मामलों में रिकॉर्ड को छुपाने और गलत जानकारी देने का भी आरोप लगा। रिपोर्ट के अनुसार, कई राइस मिलें एक ही मिलर संदीप सिंगला के नाम पर संचालित हो रही थीं और इन मिलों में धान की भारी कमी लगातार बनी रही। इसके बावजूद अधिकारियों ने समय रहते कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। नियमों का उल्लंघन और विभागीय आदेशों की अनदेखी जांच में यह भी पाया गया कि संबंधित अधिकारियों ने 19 सितंबर 2025 को जारी विभागीय निर्देशों का पालन नहीं किया। इन निर्देशों में स्पष्ट रूप से धान के भंडारण और सत्यापन के लिए सख्त नियम तय किए गए थे, लेकिन अधिकारियों ने इनकी अनदेखी की। इसके अलावा, हरियाणा सिविल सेवा (दंड एवं अपील) नियमावली, 2016 के कई प्रावधानों का उल्लंघन भी पाया गया। जांच प्रक्रिया और जवाब मामले की गंभीरता को देखते हुए विभाग ने पहले संबंधित अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया। उन्हें आरोपों का जवाब देने और व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर भी दिया गया। 17 मार्च 2026 को सुनवाई के दौरान अधिकारियों ने अपने पक्ष रखे, लेकिन जांच अधिकारी द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और तथ्यों के आधार पर उनके जवाब असंतोषजनक पाए गए। जांच रिपोर्ट (10 मार्च 2026) में स्पष्ट रूप से कहा गया कि अधिकारियों की लापरवाही के कारण धान का भौतिक सत्यापन सही तरीके से नहीं हुआ, जिससे बड़े स्तर पर सरकारी अनाज का गबन संभव हुआ। बर्खास्तगी का आदेश इन सभी तथ्यों और साक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए विभाग ने हरियाणा सिविल सेवा (Punishment Appeal) Rules, 2016 के तहत कठोर कार्रवाई करते हुए आज बुधवार को चारों अधिकारियों को सेवा से बर्खास्त कर दिया। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया कि “dismissal” एक गंभीर दंड है, जिसके तहत संबंधित कर्मचारी भविष्य में सरकारी सेवा के लिए अयोग्य हो जाता है।