कानपुर में गंगा किनारे 350 किलो की मरी हुई डॉल्फिन मिली है। स्थानीय नाविकों ने शुक्रवार शाम 5 बजे डॉल्फिन को उतराते हुए देखा। पास जाकर देखा तो पता चला कि डॉल्फिन है। नाविकों ने इसकी सूचना पुलिस और वन विभाग को दी। वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। डॉल्फिन को रस्सी से बांधकर ले गई। 8–10 लोग उसे उठाने में लगे थे। स्थानीय लोगों ने आशंका जताई है कि गंगा में प्रदूषण की वजह से डॉल्फिन की मौत हुई है। जहां शव मिला, वहां जाजमऊ क्षेत्र में सबसे ज्यादा टेनरियों का प्रदूषित पानी गंगा में गिरता है। हालांकि, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से ही मौत की वजह साफ हो सकेगी। जाजमऊ थाना प्रभारी जितेंद्र सिंह ने बताया- डॉल्फिन की लंबाई 10 फीट है। शव 2 से 3 दिन पुराना लग रहा है। डॉल्फिन को वन विभाग के रेंजर राकेश पांडेय को सौंप दिया गया है। 2 तस्वीरें देखिए- गाजीपुर में दम घुटने से हुई थी डॉल्फिन की मौत
गाजीपुर में 23 दिसंबर 2025 को पांच फीट लंबी और लगभग 150 किलो वजनी डॉल्फिन (नर) का शव कालूपुर घाट के किनारे मिला था। डिप्टी सीवीओ सर्वेश कुमार की निगरानी में तीन सदस्यीय डॉक्टरों की टीम ने पोस्टमॉर्टम किया था। 26 दिसंबर को पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आई, जिसमें मौत का कारण दम घुटना बताया गया। हालांकि, दम घुटने का कारण स्पष्ट नहीं हो पाया था। इसकी जांच के लिए एक टीम लगाई गई है। टीम 30 दिन में अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।
डॉल्फिन एक्सपर्ट और वेस इंडिया के डायरेक्टर डॉ. राजेश कुमार श्रीवास्तव ने बताया- डॉल्फिन के सुरक्षित जीवन के लिए गंगा के पानी में घुलित ऑक्सीजन (DO) कम से कम 5 mg/L होनी जरूरी है। अगर DO का स्तर 3 से 4 mg/L के बीच आ जाता है, तो डॉल्फिन लगातार तनाव में रहती है और उसका प्रजनन प्रभावित होने लगता है। जब यह स्तर 3 mg/L से नीचे चला जाता है, तो लंबे समय तक डॉल्फिन का जीवित रहना संभव नहीं होता। पारा, सीसा और कैडमियम जैसी भारी धातुएं बहुत कम मात्रा में भी डॉल्फिन के लिए घातक होती हैं। इससे प्रजनन क्षमता घट जाती है और शिशु डॉल्फिन की मौत का खतरा बढ़ जाता है जाजमऊ में गंगा की जल गुणवत्ता D कैटेगरी में
जाजमऊ में गंगा की जल गुणवत्ता चिंताजनक बनी हुई है। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, यहां घुलित ऑक्सीजन (DO) 8.10 मिग्रा प्रति लीटर है, जबकि BOD 3.50 मिग्रा प्रति लीटर रही। इसके साथ ही टोटल कोलीफार्म की मात्रा 4700 एमपीएन प्रति 100 एमएल और फीकल कोलीफार्म 3300 एमपीएन प्रति 100 एमएल पाई गई। जिसके आधार पर गंगा के इस हिस्से को कैटेगरी ‘D’ में रखा गया है। डॉल्फिन के बारे में क्या यह आप जानते हैं?
इससे पहले चार साल में चार डॉल्फिन की मौत
भारतीय वन्यजीव संस्थान (WWI) ने भारत की नदियों में डॉल्फिन की संख्या जानने के लिए साल–2024 में सर्वे किया। 3 मार्च 2025 को केंद्र सरकार ने इसके आंकड़े जारी किए। गंगा नदी में डॉल्फिन की संख्या 6324 पाई गई। जबकि बिजनौर से नरौरा बैराज तक इनकी संख्या 52 दर्ज की गई। 2023 में ये संख्या 50 थी। यानि बीते एक साल में दो डाल्फिन बढ़ी हैं। साल–2020 से 2024 तक मेरठ और बुलंदशहर जिले में चार डॉल्फिन की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो चुकी है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में इनकी मौत का कारण आज तक स्पष्ट नहीं हुआ है। खतरनाक केमिकल से डॉल्फिन पर संकट
गंगा में जीवों पर संकट की कई वजह दिखाई देती हैं। भारतीय वन्य जीव संस्थान के एक हालिया सर्वे में पता चला है कि गंगेय डॉल्फिन जिन छोटी मछलियों का शिकार करती हैं, वो मछलियां खतरनाक केमिकल के संपर्क में हैं। इस तरह ये केमिकल डॉल्फिन के पेट में पहुंच रहा है। बीते चार साल में मेरठ और बुलंदशहर में चार डॉल्फिन की संदिग्ध हालात में मौत हो चुकी है। आज तक इनकी मौत की सही वजह पता नहीं चल सकी। इसके अलावा बिजनौर से लेकर मेरठ, बुलंदशहर और आगे तक गंगा के खादर इलाके में जो फसल उगती है, उसमें केमिकल का प्रयोग होता है। ये केमिकल पानी के सहारे बहकर गंगा में पहुंच जाते हैं। इससे भी जलीय जीवों को खतरा रहता है। —————————————– ये खबर भी पढ़िए- कानपुर में 48 घंटे बाद कड़ाके की ठंड की चेतावनी: 64 को हार्ट अटैक आया, 861 मरीज पहुंचे; हमसफर ट्रेन 26 घंटे लेट कानपुर शहर में आज शनिवार को मौसम साफ है। कोहरा न होने के चलते विजिबिलिटी सामान्य रही। हालांकि, बर्फीली हवा से गलन पड़ रही है। लोग ठंड से राहत पाने के लिए अलाव के पास बैठे दिखे। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि आज दिन में धूप निकल सकती है, लेकिन उत्तर पश्चिमी बर्फीली हवा के चलते रात और शाम का पारा गिरेगी। पढ़ें पूरी खबर…
कानपुर गंगा में 350 किलो की डॉल्फिन की मौत:लोग बोले- प्रदूषण से जान गई; 10 लोगों ने रस्सी में बांधकर खींचा
