35 साल की महिला की KGMU गेट पर तड़प-तड़पकर मौत:12 घंटे इंतजार किया, डॉक्टरों ने दवा देकर सप्ताहभर बाद आने को कहा था

Spread the love

यूपी के बहुप्रतिष्ठित किंग जॉर्ज मेडिकल विश्वविद्यालय (KGMU) में डॉक्टरों की लापरवाही ने फिर से एक जान ले ली। मरीज को KGMU के लारी में डॉक्टरों ने भर्ती नहीं किया। बार-बार मिन्नतों के साथ उसके घरवाले बाहर ही रुककर भर्ती होने का इंतजार करने लगे। किसी भी डॉक्टर का दिल नहीं पसीजा और मरीज 12 घंटे तक तड़पती रही। आखिरकार उसकी सांसें रुक गईं। यह मामला 19 फरवरी का है। इससे पहले 5 महीने के अंदर इसी तरह की लापरवाही के चलते 2 और मरीजों की मौत हो चुकी है। अक्टूबर 2025 में एक 11 माह के बच्चे को KGMU में भर्ती नहीं किया गया था। उसकी जान मां की गोद में रहते चली गई। सितंबर 2025 में डॉक्टरों ने एक भर्ती मरीज को स्ट्रेचर पर रखकर बाहर कर दिया था। उसने सबके सामने अंतिम सांस ली। पहले ताजा मामला पढ़िए… KGMU के लारी कार्डियोलॉजी में 19 फरवरी को दिल दहला देने वाली घटना सामने आई। भर्ती के इंतजार में 35 साल की महिला ने दम तोड़ दिया। मरीज के परिजन 12 घंटे से अधिक समय तक उसे भर्ती करने की जद्दोजहद करते रहे। परिजनों का आरोप है कि डॉक्टर उनकी परेशानी को नजरअंदाज करते रहे और उनका मरीज चल बसा। जानकारी के मुताबिक, गोंडा की अविदा खातून को दिल की गंभीर बीमारी थी। स्वास्थ्य बिगड़ने पर घरवाले लॉरी कार्डियोलॉजी में इलाज के लिए पहुंचे थे। घरवालों ने मरीज को OPD में दिखाया भी था। OPD में डॉक्टर ने मरीज को देखने के बाद दवा दी और एक सप्ताह बाद दोबारा आने को कहा। इस दौरान परिजन लगातार मरीज के गंभीर स्वास्थ्य का हवाला देते रहे और उसे भर्ती करने की गुजारिश करते रहे, लेकिन मरीज को भर्ती नहीं किया गया। बेबस परिजन लारी के परिसर में ही रुक गए इस इंतजार में कि शायद उनकी सुनवाई हो जाए और उनके मरीज को समय रहते इलाज मिल जाए। आखिरकार 19 की सुबह करीब 9:30 बजे मरीज ने दम तोड़ दिया। अब पढ़िए परिजन के आरोप… 5 दिन में 3 बार डॉक्टर को दिखाया अविदा के पिता नवाब अली के मुताबिक, 5 दिन में 2 बार गंभीर हालत में अविदा को लारी कार्डियोलॉजी लेकर पहुंचे। पहली बार डॉ. ऋषि सेठी की टीम को OPD में दिखाया। दूसरी बार जब बुधवार को मरीज को लेकर पहुंचे तो OPD में डॉ. अक्षय प्रधान की टीम को दिखाया। इसके बावजूद सही तरीके से इलाज नहीं मिल सका। परिजन करते रहे मिन्नतें, डॉक्टरों का दिल नहीं पसीजा परिजन का आरोप है कि मरीज बेहद गंभीर कंडीशन में थी। बुधवार को जब OPD में उसे दिखाने पहुंचे तो गंभीर कंडीशन का हवाला देकर भर्ती करने की गुहार लगाई पर डॉक्टरों ने उनकी एक न सुनी। जूनियर डॉक्टर ने पहले मरीज को देखा और फिर रिपोर्ट देखकर दवा देकर 7 दिन बाद OPD में दिखाने को कहा लेकिन एडमिट करने को राजी नहीं हुए। इस दौरान मौके पर मौजूद एक परिचित स्टाफ ने भी भर्ती करने की सिफारिश की। उसे रेजिडेंट डॉक्टर ने यह कहकर उसे चुप करा दिया कि आखिर डॉक्टर वो हैं या कोई और? इलाज तो डॉक्टर के अनुसार ही होगा। कौन होते हैं आप? 12 घंटे इंतजार के बाद प्राइवेट की तरफ दौड़े तभी… परिजनों के मुताबिक, समय बीतने के साथ मरीज की कंडीशन लगातार बिगड़ रही थी। ऐसे में उन्हें उम्मीद थी कि बिगड़ती कंडीशन देख डॉक्टर उसे भर्ती कर लेंगे। इसी आस में उसे लेकर लारी कार्डियोलॉजी के वेटिंग एरिया में 12 बुधवार से लेकर गुरुवार सुबह तक रहे। इस दौरान लगातार भर्ती करने के लिए थोड़ी-थोड़ी में जाकर इमरजेंसी में भी गुहार लगाते रहे। पर इमरजेंसी के डॉक्टरों ने OPD के डॉक्टर द्वारा लिखी दवा खिलाने की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया। इस बीच गुरुवार सुबह जब मरीज की हालत बिगड़ गई। तब एक स्थानीय परिचित की मदद से नजदीक के प्राइवेट हॉस्पिटल में भर्ती कराने के लिए निकले। इस बीच रास्ते में भी मरीज ने दम तोड़ दिया। रोते-बिलखते परिजन फिर शव लेकर अपने गृह जनपद लौट गए। एक साल पहले भी मरीज ने हाथ जोड़े, तड़पकर मौत पिछले साल भी इसी डिपार्टमेंट में भर्ती एक मरीज की इलाज के लिए डॉक्टरों के हाथ जोड़ते हुए मौत हो गई थी। वह रोता-तड़पता जान बचाने की गुहार लगाता रहा। डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ सामने खड़े रहे, लेकिन किसी ने एक न सुनी। कुछ ही मिनट बाद मरीज की तड़प-तड़प कर मौत हो गई थी। घटना से जुड़ा एक वीडियो भी सामने आया। उसमें मरीज कभी तड़पता हुआ अपना पेट सहलाता है तो कभी डॉक्टर के हाथ जोड़ता है। एक युवक कहता है कि मरीज के नाक-मुंह से खून बह रहा है, कोई देखने वाला नहीं है। तभी वार्ड में मौजूद एक महिला कर्मचारी युवक पर चिल्लाने लगती है। उसे वार्ड से बाहर निकाल देती है। अब पढ़िए पहले के 2 मामले… 10 घंटे तक दौड़ते रहे, कहीं इलाज नहीं मिला लखनऊ में एक 11 महीने के बच्चे ने तड़प-तड़प कर मां की गोद में दम तोड़ दिया। आरोप है कि इलाज न मिलने की वजह से उसकी मौत हुई। परिवार करीब 10 घंटे तक शहर में दौड़ता रहा, लेकिन कहीं इलाज नहीं मिला। दरअसल, गुरुवार सुबह बुखार से हालत खराब होने के बाद परिवार ने बच्चे को लोकबंधु अस्पताल में भर्ती कराया। यहां वह 6 घंटे तक भर्ती रहा। बाद में स्थिति बिगड़ने पर वेंटिलेटर नहीं होने की बात कहकर उसे KGMU के ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया। लेकिन, ट्रॉमा सेंटर में बच्चे को भर्ती ही नहीं किया गया। बच्चे ने ट्रॉमा सेंटर के बाहर एम्बुलेंस में ही दम तोड़ दिया। डॉक्टर ने इंजेक्शन नहीं लगाया, स्ट्रेचर पर सांसें थमीं लखनऊ के KGMU में काकोरी बस एक्सीडेंट में घायलों को ट्रॉमा सेंटर लाने के दौरान पहले से भर्ती मरीजों को बाहर निकाल दिया गया। आरोप है कि इस दौरान पहले से भर्ती गंभीर मरीजों में से एक ने सबके सामने दम तोड़ दिया। गंभीर हालत में मरीज का अंतिम सांस लेते हुए वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में ट्रॉमा सेंटर के स्ट्रेचर पर बेहद गंभीर हालत में एक मरीज लेटा दिख रहा है। कुछ ही देर में उसकी मौत हो जाती है। मरीज के साथ आए परिजनों का आरोप है कि 3 घंटे गुजर जाने के बाद भी किसी डॉक्टर ने हाथ नहीं लगाया। बस एक्सीडेंट के घायलों को भर्ती करने के बाद भी देख लेते तो मरीज बच जाता। मृतक की पहचान हरदोई के श्रवण कुमार मिश्रा के रूप में हुई। —————– यह खबर भी पढ़िए… सरकारी अफसर की अंडरवियर लाने की ड्यूटी लगाई:प्रयागराज में ‘शाही’ प्रोटोकॉल का चार्ट बनाया, 50 अफसरों को जिम्मेदारी प्रयागराज में बीएसएनएल के एक ‘साहब’ का शाही प्रोटोकॉल चर्चा का विषय बन गया। उनके प्रस्तावित दौरे के लिए 50 अफसरों की ड्यूटी लगाई गई। बाकायदा चार्ट बनाकर सभी को अलग-अलग जिम्मेदारी सौंपी गई। पूरी खबर पढ़ें