गणेश चतुर्थी पर 100 साल बाद बनेगा 27 को नवपंचम राज योग

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चतरा के कर्मकांडी आचार्य चेतन शर्मा ने कहा कि जीवन में प्रगति और लोकप्रियता के साथ स्थिरता प्राप्त करने के लिए इस दिन भगवान गणेश का पूजन अत्यंत लाभदायक होता है। शास्त्रों में भगवान गणेश को ‘एकदंतो महबुद्धिः कहा गया है। यानी एकदंत श्रीगणेश ने समस्या के समाधान के लिए बुद्ध के प्रतीक अपने गजशीश में उपलब्ध दोनों दांत का उपयोग नहीं करते हैं।

ऐसे करें गणेश की प्रतिमा की स्‍थापना

गणपति पूजा के दिन अपने दफ्तर, कार्यालय या घरों में भगवान गणेश की पूजा करने से वास्तु दोष दूर होते हैं। भवन के जिस भाग में वास्तु दोष हो उस स्थान पर घी मिश्रित सिंदूर से दीवार पर स्वास्तिक बनाने से वास्तु दोष कम होता है। घर या कार्यस्थल के किसी भी भाग में वक्रतुण्ड की प्रतिमा या चित्र लगाए जा सकते हैं किन्तु यह ध्यान अवश्य रखना चाहिए कि किसी भी स्थिति में इनका मुंह दक्षिण दिशा या नैऋत्य कोण में नहीं होना चाहिए।

गणेश के हैं कई रूप

शास्त्रों में विधान है कि भगवान गणेश की आकृति, विभिन्न सामग्रियों से बनाकर उसका विधिवत पूजन करने से समस्याओं के समाधान सुलभ होता है।

चावल के गणेश : सफेद चावल के गणेश बनाकर उनका शीश लाल चावल से बनाएं और आम की लकड़ी के आसन पर बैठाएं। मंत्र ‘ह्रीं ब्रह्म स्तुताए नमः’ से 10 दिनों तक पूजन करें। पारिवारिक शांति मिलेगी और पति-पत्नि के संबंध मधुर होंगे।

मूंग दाल के गणेश: बुद्धि और निर्णय लेने संबंधी समस्या के समाधान के लिए हरे रंग की खड़ी मूंग और गुड़ को मिलाकर गणेश प्रतिमा बनाएं। 10 दिनों तक शूर्प कणाएं नमः’ मंत्र से पूजन करें। छात्रों को लाभ और बुद्धि संबंधी समस्या का समाधान होगा।

लाल चंदन के गणेश: लाल चंदन को पीस कर उससे गणेश प्रतिमा बनाएं लाल आसन पर स्थापित कर 10 दिनों तक ‘रक्त लम्बोदराय नमः’ मंत्र से पूजन करें। ऐसा करने से ऊर्जा बढ़ेगी, प्रतियोगिता में सफलता के साथ रोग भी शांत हो सकते हैं।

गोबर के गणेश: गाय के गोबर से गणेश बनाकर उसे सुखा लें। साथ ही 10 दिन ‘ब्रह्म वित्तमाये नमः’ का पूजा के समय जाप करें। इससे आर्थिक और कोर्ट-कचहरी संबंधी समस्या का निवारण हो सकेगा।