10 साल के बच्चे ने पिता को मगरमच्छ से बचाया:राष्ट्रपति मुर्मू ने दिया सम्मान, बबूल के डंडे से मार-मारकर पैर छुड़ाया था

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आगरा के रहने वाले 10 साल के अजय को राष्ट्रपति ने उसकी बहादुरी के लिए सम्मानित किया है। अजय ने अपने पिता को मगरमच्छ से बचाया था। मगरमच्छ ने अजय के पिता का पैर पकड़ रखा था। ये देखते ही उसने बबूल की कांटे की लकड़ी उठाई। फिर मगरमच्छ को इतना मारा कि उसने पिता का पैर छोड़ दिया। अजय की बहादुरी और त्वरित फैसले की क्षमता को देखते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अजयराज को सम्मानित किया। सम्मान मिलने के बाद पीएम मोदी ने भी अजय से मगरमच्छ के हमले के समय की कहानी पूछी। इसके बाद उसे राष्ट्रपति भवन में ही चॉकलेट और बिस्कुट भी दिए। पहले जानिए कैसे बचाई थी जान
झरनापुरा हरलालपुर गांव निवासी वीरभान (35) किसान हैं। वह अपनी पत्नी और 10 साल के बेटे अजय, बेटी किरन व छोटे बेटे सूरज के साथ रहते हैं। 25 जुलाई 2025 की दोपहर वीरभान अपने बेटे अजय और बेटी किरन के साथ चंबल नदी में पानी भरने गए थे। वीरभान ने जैसे ही नदी के अंदर जाकर अपनी बोतल डुबोई। तभी पानी के अंदर छिपे मगरमच्छ ने उन पर हमला कर दिया। उनका पैर दबोचकर नदी में खींच लिया। वीरभान ने मदद के लिए शोर मचाया। उनकी चीख सुनकर नदी के किनारे खड़े बेटे और बेटी ने भी शोर मचाया। बबूल के डंडे से मारा था
पिता की चीखपुकार सुनकर बेटे अजय ने सूझबूझ और बहादुरी दिखाई। उसने पास पड़ा बबूल का मोटा डंडा उठाया और नदी में कूद गया। मगरमच्छ को डंडे से मारना शुरू कर दिया। लगातार बबूल के डंडे की मार से मगरमच्छ ने वीरभान का पैर छोड़ दिया। मगरमच्छ अजय की तरफ भी लपका। लेकिन अजय ने मगरमच्छ के हमले से खुद को बचाया और भाग निकला। इतनी देर में किसान वीरभान भी निकलकर बाहर भाग आए। मगरमच्छ के हमले की सूचना पर ग्रामीण भी आ गए। किसान के पैर में काफी गहरा जख्म था। उसे उपचार के लिए बाह के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया था। अजय राज को राष्ट्रपति भवन में मिला सम्मान
अजय की इस साहसिक घटना की चर्चा पूरे प्रदेश में हुई। बहादुरी और त्वरित निर्णय क्षमता को देखते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन में आयोजित कार्यक्रम में अजय राज को सम्मानित किया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पुरस्कार पाने वाले बच्चों से कहा, “सभी बच्चों ने अपने परिवारों, समाज और पूरे देश का नाम रोशन किया है। इसलिए, मैं इन बच्चों के परिवार वालों को भी दिल से बधाई देती हूं। मैं महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी और उनकी पूरी टीम की भी तारीफ करती हूं, जिन्होंने इतने प्रतिभाशाली और होनहार बच्चों के लिए पुरस्कार समारोह आयोजित किया। बेटे की वजह से नया जीवन मिला
पिता वीरभान सिंह ने बताया- बेटे की वजह से नया जीवन मिला। उसकी बहादुरी को मिले सम्मान से पूरा परिवार अभिभूत है। समाजसेवी सुखदेव वर्मा वीरभान सिंह और अजय राज को नई दिल्ली लेकर गए थे। उन्होंने बताया कि समाज में अजय ने साहस और धैर्य की बड़ी लकीर खींची है। जो बच्चों के लिए प्रेरणास्रोत बनेगी। मोदी ने पूछी पिता की जान बचाने की कहानी​​​​​​
पुरस्कार मिलने के बाद अजय राज से पीएम मोदी ने पूछा- कौन सी क्लास में पढ़ते हो। अजय राज ने जवाब दिया चौथी क्लास में। उन्होंने कहा कि मन लगाकर पढ़ना। इसके बाद पीएम ने मगरमच्छ के हमले के दौरान पिता की जान बचाने की कहानी पूछी। अजय राज ने बताया कि नदी से पानी भरते समय मगरमच्छ ने पिता पर हमला कर दिया था। उनकी जान बचाने के लिए मगरमच्छ के सिर पर 10-15 लाठी मारी, तब उसने पैर छोड़ा और पापा की जान बच सकी। कहानी सुनकर प्रधानमंत्री ने अजय राज की पीठ थपथपाई। अजय ने बताया कि मोदी जी ने चॉकलेट और बिस्कुट खिलाए। जिला कलेक्ट्रेट में भी हुआ आयोजन
आगरा कलेक्ट्रेट स्थित सभागार में केंद्रीय मंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल की अध्यक्षता में वीर बाल दिवस समारोहपूर्वक मनाया गया। इस अवसर पर गुरु गोविंद सिंह जी के साहिबजादे बाबा जोरावर सिंह और बाबा फतेह सिंह की शहादत को नमन किया गया। केंद्रीय मंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल ने मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के तहत कोविड-19 महामारी में अनाथ हुए बच्चों को उपहार देकर सम्मानित किया। उन्होंने बताया कि जनपद में इस योजना के अंतर्गत 327 बच्चे पंजीकृत हैं। सरकार द्वारा ऐसे बच्चों को प्रतिमाह ₹4,000 की आर्थिक सहायता, निशुल्क शिक्षा, आवासीय विद्यालयों में प्रवेश, लैपटॉप सुविधा और बालिकाओं के विवाह हेतु ₹1.01 लाख की सहायता दी जा रही है। ——————– ये खबर भी पढ़ें…. क्रिकेटर वैभव समेत 20 बच्चों को बाल पुरस्कार:PM मोदी बोले- जेन Z और जेन अल्फा हमें विकसित भारत के लक्ष्य तक ले जाएंगे वीर बाल दिवस पर शुक्रवार को 20 बच्चों को ‘प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया। यह अवॉर्ड राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दिए। अलग-अलग क्षेत्र में बेहतरीन और बहादुरी के कामों की वजह से इन बच्चों को 18 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से चुना गया। पढे़ं पूरी खबर…